मोहाली सहित पंजाब के कई जिलों में धारा 144 लागू, चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर, आखिर यह सब क्यों? पढ़िए पूरी खबर
Section 144 imposed in Mohali on 38th anniversary of Operation Blue Star

Section 144 imposed in Mohali on 38th anniversary of Operation Blue Star

मोहाली सहित पंजाब के कई जिलों में धारा 144 लागू, चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर, आखिर यह सब क्यों? पढ़िए पूरी खबर

Punjab News : मोहाली सहित पंजाब के अमृतसर, लुधियाना व मोगा जैसे जिलों में धारा-144 लागू कर दी गई है और साथ ही चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर रखी जा रही है| खासकर संदिग्धों पर पैनी नजर है| यह तय किया जा रहा है कि किसी भी हाल में कोई अप्रिय गतिविधि न होने पाए और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त बनी रहे|

जानकारी के अनुसार, मोहाली और लुधियाना में 31 जुलाई तक धारा 144 लागू रहेगी और वहीं मोगा में 30 जून तक धारा 144 लागू रखी गई है| इस दौरान 5 और उससे ज्यादा लोगों के जुटने पर मनाही है| इस दौरान प्रदर्शन, रैलियां, बैठकें, धरने आदि पर भी रोक रहेगी। लोगों को कानून व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है।

आखिर यह सब क्यों? पढ़िए पूरी खबर....

दरअसल, आज पंजाब में 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' की 38वीं बरसी है| इस मौके पर सिखों और उनके धार्मिक स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, खासकर अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है| क्योंकि 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से ही जुड़ा हुआ है|

बतादें कि, 1980 के दशक में पंजाब के हालात बेहद खराब हो रखे थे| पंजाब में यह वह दौर था, जब पंजाब को ख़ालिस्तान बनाने की मांग और खालिस्तानी गतिविधि यहां बढ़ रही थी| इस दौर में पंजाब में मार-काट जारी थी| आलम यह था कि इस बीच ख़ालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उसके समर्थकों ने हिंसा करते हुए हरिमंदिर साहिब स्वर्ण मंदिर पर अपना कब्जा कर लिया था|

इधर, इस समय देश की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी के सामने पंजाब को लेकर सिरदर्दी बढ़ती ही जा रही थी| वहीं, हरिमंदिर साहिब स्वर्ण मंदिर पर कब्जा होने के बाद आखिरकार प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को कब्जा हटवाने की जिम्मेदारी दी|

जहां, भारतीय सेना ने एक ऑपरेशन शुरू किया| जिसे नाम मिला 'ऑपरेशन ब्लू स्टार'| 6 जून 1984 को भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन में जनरैल सिंह भिंडरावाले को मार गिराया और हरिमंदिर साहिब स्वर्ण मंदिर को आजादी मिली व इसी के साथ यह ऑपरेशन भी खत्म हो गया|

बताते हैं कि, इस ऑपरेशन में जनरैल सिंह भिंडरावाले और उसके समर्थकों व अन्य लोगों सहित 450 से ज्यादा लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे| इस ऑपरेशन से सेना को भी काफी नुक्सान पहुंचा था| सेना के भी कई जवानों की जान चली गई थी|