राजस्थान चतुर्थ श्रेणी भर्ती: हाईकोर्ट ने शून्य कटऑफ मामले में एकलपीठ के आदेश पर लगाई रोक
- By Gaurav --
- Saturday, 25 Jul, 2026
Rajasthan High Court Stays Single
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 से जुड़े शून्य कटऑफ विवाद में महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें शून्य कटऑफ वाली विभिन्न श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द करने के निर्देश दिए गए थे। इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है और पूर्व की चयन प्रक्रिया यथावत बनी रहेगी।
मामले की सुनवाई जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड और राज्य सरकार की ओर से दायर अपील पर की। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद एकलपीठ ने 22 मई के आदेश में नई पात्रता शर्त जोड़ दी, जबकि भर्ती नियमों और विज्ञापन में न्यूनतम अंक निर्धारित करने का कोई प्रावधान नहीं था। इसलिए चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई शर्त लागू करना उचित नहीं माना जा सकता।
सरकार ने यह भी कहा कि एकलपीठ के आदेश से बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं, जबकि उन्हें मामले में पक्षकार भी नहीं बनाया गया था। इन दलीलों पर विचार करते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले एकलपीठ ने शून्य कटऑफ वाली श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द करते हुए कहा था कि किसी भी सरकारी भर्ती में न्यूनतम अंक निर्धारित होना आवश्यक है। अदालत का मानना था कि न्यूनतम योग्यता तय किए बिना चयन प्रक्रिया संवैधानिक मानकों पर खरी नहीं उतरती। साथ ही कर्मचारी चयन बोर्ड को भविष्य की भर्तियों में न्यूनतम अंक निर्धारित करने की स्वतंत्रता भी दी गई थी।
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि भर्ती विज्ञापन और नियमों में न्यूनतम अंकों का कोई उल्लेख नहीं था। ऐसे में जिन श्रेणियों में कटऑफ शून्य रही, वहां शून्य अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को भी चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि हाईकोर्ट ने अभी यह अंतिम निर्णय नहीं दिया है कि शून्य अंक प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी मिलेगी। अदालत ने फिलहाल केवल एकलपीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है। मामले का अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई और सभी पक्षों के जवाब के बाद ही होगा।