मंडी गोबिंदगढ़ में नशे का कहर: दो युवकों की मौत के बाद पुलिस ने चलाया बड़ा सर्च ऑपरेशन
Havoc of drugs in Mandi Gobindgarh
मंडी गोबिंदगढ़ (फतेहगढ़ साहिब)। पंजाब सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और जिला पुलिस के भारी-भरकम दावों के बावजूद औद्योगिक नगरी मंडी गोबिंदगढ़ में नशे का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
शहर में सरेआम नशा बिकने का वीडियो वायरल होने और पिछले 24 घंटों के भीतर अलग-अलग स्थानों से दो युवकों की लाशें बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। शुरुआती कयासों के मुताबिक दोनों नौजवानों की मौत नशे की ओवरडोज के कारण हुई है। इन मौतों के बाद गहरी नींद से जागी पुलिस एक बार फिर हरकत में आई है।तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला फतेहगढ़ साहिब पुलिस ने आनन-फानन में मंडी गोबिंदगढ़ की मास्टर कॉलोनी में "युद्ध नशे के विरुद्ध" अभियान के तहत एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। डीएसपी अमलोह बिक्रमजीत सिंह घुम्मन की अगुवाई में भारी पुलिस बल ने संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी।
पुलिस द्वारा नशा तस्करों पर नकेल कसने के लिए लगातार 'कासो' ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, और कई बड़े तस्करों की निजी संपत्तियों को भी ध्वस्त किया जा चुका है, लेकिन जमीन पर हकीकत यह है कि नशे का यह जाल रह-रहकर दोबारा सिर उठा लेता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी शुभम अग्रवाल ने पुलिस कार्रवाई के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि मार्च 2025 से अब तक जिला पुलिस ने छोटे-बड़े नशा तस्करों के खिलाफ 1,930 मामले दर्ज कर करीब 4,130 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है।
पुलिस केवल तस्करों पर ही कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि नशे की दलदल में फंसे करीब 2,000 युवाओं को विभिन्न नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराकर उनका इलाज भी कराया गया है। इन युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग देकर नौकरी के काबिल भी बनाया जा रहा है।
एसएसपी अग्रवाल ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि पंजाब सरकार की ड्रग्स विरोधी नीति के तहत फतेहगढ़ साहिब जिले में नशा बेचने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। "युद्ध नशे के विरुद्ध" तब तक जारी रहेगा जब तक इस नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद नहीं कर दिया जाता।
उन्होंने भटके हुए युवाओं से अपील की कि जो भी नशा छोड़कर अच्छी जिंदगी जीना चाहता है, सरकार उसकी हरसंभव मदद करेगी। इस विशेष सर्च ऑपरेशन के दौरान कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और भारी संख्या में कर्मचारी मुस्तैद रहे। बहरहाल, पुलिस के इन दावों के बीच 24 घंटे में दो मौतें पुलिसिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान जरूर खड़े करती हैं।