उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के लिए बड़ी राहत की तैयारी
Preparations for major relief for workers in Uttar Pradesh
लखनऊ। प्रदेश सरकार श्रमिकों के लिए बड़ी राहत देने की तैयारी में है। अब तक अस्थायी कैंपों में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बजाय श्रमिकों को स्थायी और कैशलेस इलाज से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही उनके रहने के लिए हॉस्टल सुविधा शुरू करने पर भी काम तेज हो गया है।
पिछले वित्तीय वर्ष में कारखानों में 2.77 लाख पुरुष और 23,941 महिला श्रमिक पंजीकृत थे। ई-श्रम पोर्टल पर प्रदेश के 8.42 करोड़ असंगठित श्रमिकों का डाटा दर्ज है। इनमें से 7.06 करोड़ से अधिक श्रमिकों को राशन कार्ड उपलब्ध कराया जा चुका है।
करीब 35 लाख श्रमिक पहले खाद्य सुरक्षा योजना से वंचित थे, जिन्हें अब जोड़ा गया है। बड़ी संख्या में श्रमिकों को अभी भी सामाजिक सुरक्षा की जरूरत है। प्रदेश में बहुत से श्रमिक ईएसआइ और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से बाहर हैं। जिन्हें समय - समय पर अस्थायी कैंप के माध्यम से इलाज की सुविधा मिलती है, इसे ध्यान में रखते हुए श्रम विभाग नई स्वास्थ्य योजनाएं तैयार कर रहा है। प्रस्ताव है कि ऐसे श्रमिकों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जोड़ा जाए, जिससे उन्हें अस्पताल में भर्ती, सर्जरी, जांच और दवाओं की कैशलेस सुविधा मिल सके।
इसके साथ ही श्रमिकों को काम के लिए शहरों में आकर रहने में काफी परेशानी होती है। इसे देखते हुए सरकार हास्टल सुविधा शुरू करने की तैयारी कर रही है, ताकि उन्हें सुरक्षित और सस्ती आवासीय व्यवस्था मिल सके। श्रमिकों के साथ उनके बच्चों के लिए पहले से चल रही छात्रवृत्ति योजनाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।
वर्तमान में जिन श्रमिकों की मासिक आय 24 हजार रुपये से कम है, उनके लिए श्रम कल्याण परिषद आठ योजनाएं चला रही है। इनमें बच्चों की पढ़ाई, खेल, कन्यादान और धार्मिक पर्यटन के लिए 2,500 से एक लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। हालांकि जानकारी के अभाव में इसमें आवेदन अभी कम है।
चार श्रम संहिताओं से मिलेगा सुरक्षा कवच
केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं, जिनसे श्रमिकों और उद्योग दोनों के हित सुरक्षित होंगे। इसमें वेतन संहिता में न्यूनतम वेतन और समय पर भुगतान, औद्योगिक संबंध संहिता में हड़ताल, छंटनी और विवाद समाधान, ओएसएच संहिता में कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा संहिता में पीएफ, ईएसआइ, ग्रेच्युटी और गिग वर्कर्स के अधिकार का प्रविधान किया गया है। इन श्रम संहिताओं के आधार पर प्रदेश की नियमावली तैयार हो रही है। इस नियमावली के लागू होने से श्रमिकों के हित में कई योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।