पांच सूत्री मांगों को लेकर पंचायत सचिवों का महाधरना जारी, निलंबन के खिलाफ बढ़ा विरोध
Panchayat secretaries' protest continues over five-point
पटना। बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के आह्वान पर गर्दनीबाग धरना स्थल पर महाधरना दे रहे सैकड़ों पंचायत सचिव शनिवार को भी डटे रहे। दूसरे दिन संघ के अध्यक्ष बीरेंद्र कुमार ने निलंबित पंचायत सचिवों को माला पहना कर उनका सम्मान किया।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज विभाग ने हड़ताल को कमजोर करने के लिए समस्तीपुर, मधुबनी, दरभंगा, वैशाली, सिवान, गोपालगंज जिलाें के पंचायत सचिवों को निलंबित किया है। इससे हमारी हड़ताल और मजबूत हुई है।
राकेश रंजन ने कहा कि सभी 38 जिलों के पंचायत सचिवों ने प्रण लिया है कि जब तक पांच सूत्री मांगें पूरी नहीं होती हैं, वे हड़ताल पर रहेंगे। इसके लिए हर पंचायत सचिव निलंबन रूपी माला पहनने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।
यह धरना 20 मई तक चलेगा। संघ के अध्यक्ष ने कहा कि पंचायत राज विभाग के रवैये और कई जिलों में पंचायत सचिवों पर हुई कार्रवाई के विरोध में यह आंदोलन किया जा रहा है।
धरने में शामिल विभिन्न जिलों के सैकड़ों पंचायत सचिवों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरने को महासंघ के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिंह, कृष्णानंद शर्मा, ललन कुमार साह, बीरबल कुमार, संजय कुमार, बिजेन्द्र कुमार, राजकिशोर सिन्हा, अनीस कुमार, नीतीश कुमार, गौरव प्रधान, सतीश कुमार, सन्नी कुमार आदि ने संबोधित किया। इससे पूर्व 4 मई को एक दिवसीय महाधरना दिया गया था।
ये हैं पांच मांगें
- जिलास्तरीय स्थानांतरण लागू किया जाए।
- शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की जाए।
- यात्रा भत्ता बढ़ाकर 2000 रुपये किया जाए।
- ग्रेड पे 4200 रुपये निर्धारित किया जाए।
- 55 वर्ष से अधिक के पंचायत सचिवों की प्रोन्नति प्रखंड पंचायत पदाधिकारी पद पर नहीं करने का आदेश वापस लिया जाए।
ग्रामीणों को हो रहीं ये समस्याएं
पंचायत व सरकार के बीच तमाम प्रशासनिक व विकास कार्य इन सचिवों के हवाले होते हैं। ग्राम पंचायत की बैठकों का आयोजन, पंचायत अभिलेखों का संधारण, केंद्र-राज्य सरकार की मनरेगा, आवास योजना आदि को लागू कराना, योजनाओं की प्रगति की निगरानी व रिपोर्ट बनाना, लाभुकों का चयन व उसकी सूची बनाना, पंचायत निधि का लेखा-जोखा, जन्म, मृत्यु, विवाह आदि का पंजीकरण, प्रमाणपत्र बनवाने में सहयोग, ग्रामीणों की शिकायतों को विभाग तक पहुंचाना, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि आदि विभागों से समन्वय, स्वच्छता, जल संरक्षण, सड़क निर्माण जैसे कार्यों में सहयोग इनकी जिम्मेदारी हैं।