Nitish Kumar Nomination: CM की कुर्सी छोड़ नीतीश कुमार राज्यसभा चले; अमित शाह की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन

CM की कुर्सी छोड़ नीतीश कुमार राज्यसभा चले; अमित शाह की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन, JDU कार्यकर्ता विरोध में उतरे

Nitish Kumar Files Nomination For Rajya Sabha Bihar Politics News

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Nitish Kumar Nomination: नीतीश बाबू अब बिहार की सत्ता को छोड़ दिल्ली आ रहे हैं। नीतीश कुमार ने राज्यसभा आने के लिए बिहार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का फैसला कर लिया है, जो उनके समर्थकों के साथ-साथ सभी को चौंका रहा है। आज पटना में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में CM नीतीश कुमार ने NDA उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। नीतीश के साथ-साथ बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार ने भी राज्यसभा के लिए नामांकन भरा।

नीतीश को लेकर दो खेमों में बंटे JDU कार्यकर्ता-नेता

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर JDU कार्यकर्ता-नेता दो फाड़ दिख रहे हैं यानि दो खेमों में बंटे हुए देखे जा रहे हैं। आज सुबह बिहार मुख्यमंत्री आवास के बाहर कई JDU कार्यकर्ता और नेता विरोध प्रदर्शन करते देखे गए। नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के लिए जाने से पहले नाराज कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ भी की और और कहा वो नीतीश कुमार को नामांकन नहीं भरने देंगे। बताया जा रहा है कि कई विधायक भी नीतीश के इस फैसले से नाराज हैं। हालांकि JDU का एक गुट नीतीश कुमार के इस फैसले का स्वागत कर रहा है। कई JDU नेताओं का कहना है कि नीतीश की स्वयं की प्रबल इच्छा है की वो राज्यसभा जायें और उनकी इच्छा का सम्मान है।

नीतीश कुमार बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ

नीतीश कुमार का नामांकन भरवाने पटना आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ''आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा में अपना नामांकन दाखिल किया है। इसके साथ ही बहुत ही लंबे अरसे के बाद नीतीश कुमार फिर से एक बार राष्ट्रीय राजनीति में राज्यसभा सांसद के नाते प्रवेश करेंगे। 2005 से लेकर आज तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उनका ये कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में लिखा जाएगा और बिहार के विकास के सारे मायने को उन्होंने गति देने का काम किया।  उन्होंने अपने शासन काल में बिहार को जंगलराज से मुक्त करने का काम किया।

शाह ने आगे कहा, ''उन्होंने न केवल बिहार की सड़कों को गांव तक जोड़ा, उसकी स्थिति में भी सुधार किया। इतने लंबे कार्यकाल में  विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रहते हुए उनके कुर्ते पर कभी दाग नहीं लगा। भ्रष्टाचार का आरोप लगे बिना इतना लंबा राजनीतिक सफर शायद ही किसी ने तय किया हो जो नीतीश कुमार ने तय किया है। बिहार के हर गांव, हर घर में बिजली पहुंचाने में भी उनका बहुत बड़ा योगदान रहा। हमेशा नीतीश कुमार सादगी, सूचिता और सार्वजनिक जीवन के उच्चतम मूल्यों के पक्षधर रहे जिनका पालन उन्होंने भी किया। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 साल तक बिहार को हर प्रकार से आगे ले जाने में अपना योगदान किया।

अमित शाह ने आगे कहा, ''उनके नेतृत्व में ही पीएम मोदी द्वारा भेजी गई सभी योजनाएं बिहार के जन-जन तक पहुंची। 1974 के जयप्रकाश आंदोलन के वे प्रमुख नेता रहे हैं और तब से लेकर आज तक पूरा जीवन जे.पी. के सिद्धांतों पर बिताने का प्रयास किया। फिर से एक बार राज्यसभा सांसद होने के नाते वे दिल्ली आ रहे हैं। मैं और NDA के सभी साथी उनका हृदय से स्वागत करते हैं। उनका जो कार्यकाल मुख्यमंत्री होने के नाते हैं, उसे बिहार के लोग याद भी करेंगे और उसका सम्मान भी करेंगे। मैं फिर से नितिन नवीन और नीतीश कुमार का राज्यसभा में आने पर स्वागत करता हूं।"

मैं राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं

इससे पहले आज बुधवार सुबह नीतीश कुमार ने खुद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए आधिकारिक तौर से यह जानकारी दी थी कि वह राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहे हैं। इसके साथ ही नीतीश कुमार ने बिहार में बनने वाली नई सरकार को लेकर कहा कि जो नई सरकार बनेगी उसको उनका पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा। साथ ही नीतीश ने बिहार के लोगों का आभार भी व्यक्त किया था, जिन्होंने उन्हें इतने लंबे समय तक बिहार की जिम्मेदारी दी। नीतीश के इस बयान के बाद से ही से यह साफ हो हो गया था कि वह बिहार की सत्ता से विदाई लेकर राज्यसभा आ रहे हैं।

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नीतीश कुमार कब-कब बने बिहार के CM?

नीतीश कुमार सबसे पहले मार्च 2000 में हुए चुनाव के बाद करीब 7 दिन के लिए बिहार के सीएम बने थे। उस वक्त नीतीश कुमार की सरकार बहुमत हासिल न कर पाने के कारण गिर गई। फिर नवम्बर 2005 में चुनाव के बाद नीतीश कुमार दूसरी बार बिहार के सीएम बने। इस दौरान नीतीश कुमार ने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया। वहीं नवम्बर 2010 में चुनाव के बाद नीतीश कुमार ने तीसरी बार सीएम पद की शपथ ली और लगभग 3.5 साल के लिए बिहार के सीएम रहे। इसके बाद बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा।

वहीं फरवरी 2015 में नीतीश कुमार ने मांझी को हटाकर चौथी बार सीएम पद की शपथ ली और करीब 9 महीना बिहार के सीएम रहे। जबकि नवम्बर 2015 में हुए चुनाव बाद पाँचवीं बार नीतीश कुमार ने सीएम पद की शपथ ली और 1.8 साल तक बिहार के सीएम रहे। वहीं जुलाई 2017 में फिर से नीतीश कुमार पलटे और छठी बार सीएम पद की शपथ ली और इस दौरान 3.4 साल के लिए बिहार के सीएम रहे। इसके बाद आगे भी नीतीश के सीएम बनने का सिलसिला जारी रहा.

नवम्बर 2020 में हुए चुनाव के बाद नीतीश कुमार ने 7वीं बार सीएम पद की शपथ ली और लगभग 19 महीने बिहार के सीएम रहे। क्योंकि अगस्त 2022 में बीजेपी का साथ छोड़ने और RJD के साथ जाने के बाद नीतीश कुमार ने 8वीं बार सीएम पद की शपथ ली और करीब 1.5 महीना बिहार के सीएम रहे। इसके बाद जनवरी 2024 में फिर से बीजेपी के साथ आकर 9वीं बार नीतीश कुमार बिहार के सीएम बने। वहीं 2025 विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश ने 20 नवंबर को 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

केंद्र में मंत्री रहे नीतीश कुमार

ज्ञात रहे कि जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। नीतीश ने मार्च 1998 से अगस्त 1999 और फिर मार्च 2001 से मई 2004 तक पूर्व अटल बिहारी बाजपाई की सरकार में रेल मंत्रालय संभाला और बतौर रेल मंत्री रेलवे व्यवस्था में कई अहम बदलाव किए। रेल मंत्री रहने के अलावा नीतीश केंद्रीय परिवहन मंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भी रहे। नीतीश कुमार की गिनती देश के ऐसे नेताओं में की जाती रही है जो पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए मजबूरी रहे हैं। यानि चाहें सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों खेमों ने नीतीश कुमार को अपने पाले में रखने की कोशिश की है। इसीलिए नीतीश कुमार के बारे में एक स्लोगन भी खूब चर्चा में रहता है कि ''नीतीश सबके हैं''