चीन सीमा पर तैनात जवानों को बड़ी राहत, अब मिलेगा 4जी नेटवर्क
Major Relief for Troops Deployed at China Border
गाजियाबाद। Major Relief for Troops Deployed at China Border, चीन सीमा पर दुर्गम और अत्यधिक ठंडे इलाकों में तैनात भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों को अब संचार के लिए बड़ी राहत मिलने जा रही है। माइनस 40 डिग्री तापमान में देश की सुरक्षा में जुटे सैनिक अब सेटेलाइट फोन के साथ-साथ मोबाइल फोन का भी इस्तेमाल कर सकेंगे।
इसके लिए सीमावर्ती 195 चौकियों पर 4जी मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। जिससे संचार व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। ऑपरेशनल कम्युनिकेशन के साथ-साथ जवानों को अपने परिवार से बातचीत करने में आसानी होगी।
वहीं संचार से संबंधित उपकरणों की रिपेयरिंग भी जवान खुद करेंगे। वहीं सुरक्षा को लेकर मोबाइल के प्रयोग पर तकनीकी रूप से निगरानी रखी जाएगी। जिससे सुरक्षा में सेंध न लग सके।
भारत-चीन सीमा पर स्थित आईटीबीपी की कुल 195 चौकियां अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। यहां अब तक मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। इन इलाकों में जवानों को संचार के लिए मुख्य रूप से सेटेलाइट फोन पर निर्भर रहना पड़ता था, जो महंगा होने के साथ सीमित सुविधाएं देता है।
सभी चौकियों पर 4जी टावर लगाए जाएंगे
केंद्र सरकार द्वारा इन सभी चौकियों पर 4जी टावर स्थापित किए जा रहे हैं। 195 में से 146 चौकियों पर टावर स्थापित किए जा चुके हैं। अब जवान न केवल मोबाइल काॅल कर सकेंगे, बल्कि डाटा सेवाओं का भी उपयोग कर सकेंगे।
चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में तापमान सर्दियों के दौरान माइनस 40 डिग्री तक पहुंच जाता है। ऐसे में संचार व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। मोबाइल टावर लगने से अब इन परिस्थितियों में भी नेटवर्क उपलब्ध रहेगा। जिससे सुरक्षा कार्यों की निगरानी और समन्वय बेहतर हो सकेगा।
एएलटीटीसी को सौंपी तकनीकी जिम्मेदारी
गाजियाबाद स्थित एशिया के सबसे बड़े एडवांस लेवल टेलीकाॅम ट्रेनिंग सेंटर (ALTTC) को आईटीबीपी के बीटीएस (बेस ट्रांसीवर स्टेशन) उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी है। आईटीबीपी के संचार नेटवर्क को सुचारू बनाए रखने के लिए एएलटीटीसी की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा।
इस कार्य को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए गृह मंत्रालय, आईटीबीपी और बीएसएनएल के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया है। इसके तहत बीटीएस उपकरणों की नियमित मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा।
जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में नेटवर्क बाधित न हो। बीटीएस सिस्टम की रिपेयरिंग और मेंटेनेंस का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। सभी 4जी टावर लगातार सुचारु रूप से कार्य करते रहेंगे।
रिपेयरिंग भी खुद करेंगे जवान
चीन सीमा पर दुर्गम क्षेत्र में टावर या संचार से संबंधित यदि कोई तकनीकी समस्या आती है तो उसके लिए बीएसएनएल के इंजीनियरों को पहुंचने में कई दिन का समय लग सकता है। समय पर टावर या संचार से जुड़े अन्य उपकरणों की मरम्मत समय पर नहीं होने से परेशानी होगी।
ऐसे में आईटीबीपी के जवानों को एएलटीटीसी के विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे। जिससे जवान संचार से जुड़े उपकरणों की खुद ही मरम्मत कर सकेंगे। लगभग 500 से ज्यादा जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
चीन सीमा पर दुर्गम क्षेत्र में 195 चौकियों पर 4जी मोबाइल टावर लगाए जाने हैं। संचार व्यवस्था और अधिक मजबूत मिलेगी। इससे आपरेशनल कम्युनिकेशन के साथ जवानों को अपने परिवार से संपर्क बनाए रखने में भी आसानी होगी। 500 से अधिक जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे वह संचार के उपकरणों की खुद ही रिपेयरिंग कर सकें।
- केके यादव, सहायक निदेशक, एएलटीटीसी
सुरक्षा का रखा जाएगा ध्यान
एएलटीटीसी सहायक निदेशक केके यादव ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित बीटीएस साइटों की सुरक्षा को 24 घंटे निगरानी और आधुनिक सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। बीटीएस फेंसिंग और एक्सेस कंट्रोल सुनिश्चित करेगा।
ट्रांसमिशन नेटवर्क की निगरानी, केबल कटिंग से बचाव और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन लागू रहेगा। जिस तहर से सामान्य सीमा क्षेत्रों में मोबाइल प्रयोग की सुरक्षा पर पैनी नजर रखी जाती है इसी तहर चीन सीमा की इन चौकियाें पर मोबाइल प्रयोग के दौरान रखी जाएगी।