असम के चाय बागानों में झामुमो की हुंकार: हेमंत सोरेन ने ₹250 मजदूरी को बताया 'क्रूर मजाक'
JMM's Roar in Assam's Tea Gardens
रांची । JMM's Roar in Assam's Tea Gardens, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने असम के विधानसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने रविवार को असम के विभिन्न क्षेत्रों में जनसभाएं कर चाय बागान श्रमिकों के हक और आदिवासियों की संवैधानिक पहचान का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया।
मजदूरी नहीं, यह श्रमिकों के साथ क्रूर मजाक है: हेमंत सोरेन
असम के चराइदेव जिले के सोनारी विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सरकार और चाय बागान प्रबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में चाय बागान मजदूरों को मिलने वाली 250 रुपये की दैनिक मजदूरी एक क्रूर मजाक है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों को सचेत करते हुए कहा कि चुनाव के समय दी जाने वाली मामूली आर्थिक सहायता उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के बजाय कमजोर रखने की एक बड़ी साजिश है। उन्होंने अपील की कि लोग अल्पकालिक लाभ के चक्कर में अपने भविष्य और अधिकारों से समझौता न करें।
असम में आदिवासी पहचान का संकट
हेमंत सोरेन ने असम में रह रहे आदिवासी समुदाय की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अन्य राज्यों में जहां आदिवासियों को संवैधानिक सुरक्षा मिली हुई है, वहीं असम में वे आज भी अपनी पहचान के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने इसके लिए राजनीतिक उपेक्षा को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि झारखंडी समाज भीख नहीं मांगता, बल्कि लड़कर अपना हक हासिल करना जानता है। झामुमो अब असम के चाय बागान श्रमिकों की आवाज बनेगा और उनके अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करेगा।
मार्गेरिटा में कल्पना सोरेन ने भरी हुंकार
दूसरी ओर, तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा विधानसभा क्षेत्र में झामुमो की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन ने पार्टी प्रत्याशी जरनेल मिंज के समर्थन में जनसंपर्क किया। उन्होंने कहा कि पार्टी असम के श्रमिक समुदायों और आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कल्पना सोरेन ने लोगों से झामुमो को वोट देने की अपील करते हुए कहा कि यह समय अपनी आवाज को मजबूत करने का है। असम में झामुमो का यह आक्रामक रुख संकेत दे रहा है कि पार्टी अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं है।
पड़ोसी राज्यों में भी आदिवासी पहचान और श्रमिक अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति पर काम कर रही है। चाय बागान क्षेत्रों में झामुमो की सक्रियता ने असम के राजनीतिक समीकरणों में एक नई हलचल पैदा कर दी है।