India Bans Import of Gold, Silver and Platinum

विदेश से सोने-चांदी के गहनों के आयात पर सरकार सख्त, बिना अनुमति अब नहीं मंगा पाएंगे ज्वेलरी

undefined

India Bans Import of Gold, Silver and Platinum

भारत में कीमती धातुओं के लगातार बढ़ते दामों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब विदेशों से सोने, चांदी और प्लेटिनम के बने-बनाए गहनों को भारत लाना आसान नहीं रहेगा। सरकार ने इन गहनों के आयात पर तत्काल प्रभाव से सख्त पाबंदी लगा दी है।

यह फैसला मुख्य रूप से उन लोगों को रोकने के लिए लिया गया है जो व्यापार समझौतों की खामियों का फायदा उठाकर गलत तरीके से देश में गहने आयात कर रहे थे।

क्यों लिया गया यह फैसला?

पिछले कुछ समय में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। जनवरी 2026 में सोने की कीमत लगभग 1.92 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गई, जबकि चांदी करीब 4.20 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी।

सरकार को पता चला कि कुछ कारोबारी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का गलत इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे घरेलू बाजार और सरकारी राजस्व दोनों को नुकसान हो रहा था।

इसी गड़बड़ी को रोकने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इन गहनों की श्रेणी को ‘मुक्त’ से बदलकर ‘प्रतिबंधित’ कर दिया है।

अब क्या बदल जाएगा?

नए नियम के तहत अब कोई भी व्यापारी सरकार की विशेष अनुमति या लाइसेंस के बिना विदेश से गहने आयात नहीं कर सकेगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह नियम पुरानी बुकिंग, अग्रिम भुगतान या रास्ते में मौजूद माल पर भी लागू होगा। यानी अब हर स्थिति में सरकारी मंजूरी लेना जरूरी होगा।

हालांकि, जो कंपनियां पूरी तरह निर्यात के लिए काम करती हैं या विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित हैं, उन्हें इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।

बाजार और आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार के इस फैसले के कई प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

सबसे पहले, विदेशों खासकर थाईलैंड जैसे देशों से आने वाले सस्ते गहनों की आपूर्ति कम हो सकती है। इससे घरेलू बाजार में सप्लाई पर कुछ दबाव पड़ सकता है और कीमतों में हल्की बढ़ोतरी भी संभव है।

हालांकि इसका सकारात्मक पहलू यह है कि इससे भारत के स्थानीय कारीगरों और ज्वेलरी उद्योग को अधिक काम मिलेगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

इसके अलावा विदेशी मुद्रा की बचत होने से देश के व्यापारिक घाटे को कम करने में भी मदद मिल सकती है।