सूबेदार पवन कुमार जरयाल को मिला राष्ट्रीय सम्मान, ऑपरेशन सिंदूर में वीरगति के बाद परिवार ने जताया गर्व
Subedar Pawan Kumar Jaryal receives national honour
धर्मशाला। Subedar Pawan Kumar Jaryal receives national honour, 'जब उनके घायल होने की सूचना आई थी, हमने सोच लिया था कि यदि वह लौट आते हैं तो हमारे हैं और नहीं लौटते हैं तो देश के हो जाएंगे। और यह इससे सिद्ध हो गया कि उनका नाम अब राष्ट्रीय समर स्मारक के त्याग चक्र में चमकेगा। आने वाली पीढ़ियां जानेंगी कि कैसे सूबेदार पवन कुमार ने असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।’
यह कहना है बलिदानी सूबेदार पवन कुमार जरयाल की पत्नी वीरनारी सुषमा जरयाल का।
शाहपुर के सिहोलपुरी स्थित उनके घर जब जागरण यह सूचना लेकर पहुंचा कि केंद्र सरकार ने पहली बार जिन छह सैनिकों के नाम ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में सार्वजनिक किए हैं, उनमें पहले क्रम पर पवन कुमार हैं तो स्वजन की भावनाएं दुख और गर्व दोनों को प्रकट कर रही थीं।
'उन्हें खोने के क्षण दर्द से भरे जरूर थे...'
वीरनारी सुषमा कहती हैं, "उन्हें खोने के क्षण दर्द से भरे जरूर थे, लेकिन अब यह संतोष है कि मेरे पति का नाम देश के महान वीरों के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया है। मेरे बच्चे भी सेना में जाना चाहें तो वह उन्हें पूरी सहमति और आशीर्वाद दूंगी। मैं तो आसपास के युवाओं से भी कहती हूं कि देश की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और हर युवा को सेना में जाकर राष्ट्ररक्षा में जुटना चाहिए।"
बलिदानी के पिता हवलदार गरज सिंह कहते हैं, "पवन देश रक्षा में अमर हुआ है। मैं अपने सैन्य जीवन में जो न कर पाया, वह मेरे बेटे ने कर दिखाया। मुझे अपने बेटे पर गर्व है।"
पिताजी की वजह से हमारा नाम सम्मान से लिया जाता है: बेटी अनामिका
बलिदानी की बेटी अनामिका की आवाज में पिता के साहस पर गर्व साफ झलक रहा था। वह कहती हैं, " पिताजी की वजह से आज हमारा नाम सम्मान से लिया जाता है। हम घर से बाहर निकलते हैं, उनका नाम हमें हमेशा शक्ति देता है।"
मां किशो देवी भी बेटे की उपलब्धि से गौरवान्वित हैं। बलिदानी के स्वजन साफ कहते हैं, " पवन केवल हमारे परिवार का सदस्य नहीं, बल्कि पूरे देश का सपूत था। उसकी कमी अपनी जगह, उसके बलिदान को सर्वोच्च सम्मान है राष्ट्रीय समर स्मारक में उसका अंकित होना। यह सम्मान हिमाचल प्रदेश और देश के उन सभी सैनिक परिवारों का सम्मान है, जिनके बेटे सीमाओं पर देश की रक्षा करते हैं।"।
पाकिस्तानी गोलाबारी का जवाब देते हुए पवन कुमार ने दिया था बलिदान
सूबेदार मेजर पवन कुमार जरियाल 9 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर के पुंछ (कृष्णाघाटी) सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। वह 25 पंजाब रेजिमेंट के सैन्य कर्मी थे और उस समय 10 ब्रिगेड में तैनात थे। उन्हें 31 अगस्त, 2026 को सेवानिवृत्त होना था। स्वजन के अनुसार, उन्होंने अपनी सैन्य सेवा की अंतिम तैनाती स्वेच्छा से जम्मू कश्मीर में ली थी।

बलिदानी के स्वजन : (बायें से) पुत्र अभिषेक, पिता सेवानिवृत्त हवलदार गरज सिंह, माता किशो देवी, वीरनारी सुषमा और बेटी अनामिका l मनीष कोहली