कानपुर में हवाला और लूट गिरोह का पर्दाफाश, लूट की घटना का विवरण

कानपुर में हवाला और लूट गिरोह का पर्दाफाश, लूट की घटना का विवरण

Hawala and robbery gang busted in Kanpur

Hawala and robbery gang busted in Kanpur,

कानपुर। हवाला और अवैध ढंग से कमाई गई रकम को लूटने वाला एक गिरोह क्राइम ब्रांच के हाथ लगा है। क्राइम ब्रांच ने देर रात मुठभेड़ में दो आरोपित और निशानदेही पर चार और दबोचे। जांच में बड़ी बात ये सामने आई लूटी गई रकम जाजमऊ के टेनरी और स्क्रैब कारोबारी महफूज की थी, जिसके व परिवार के 12 बैंकों के 68 खातों में लगभग 1600 करोड़ का लेनदेन हुआ है।

महफूज घटना के बाद से फरार है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने मामले में हवाला कारोबार और देशद्रोही गतिविधियों में रुपये लगाने की आशंका पर पुलिस की जांच के साथ ही आरबीआइ, आयकर, जीएसटी और ईडी को पत्राचार करने की बात कही है। वहीं, जांच में पता चला कि पकड़े लुटेरे घटना के बाद जामा मस्जिद, कश्मीर, नेपाल समेत जगहों पर भी गए थे।

यशोदा नगर निवासी व्यापारी मो. वासिद और उसके साथी अरशद 16 फरवरी को फूलबाग में एलआइसी बिल्डिंग स्थित आइडीबीआइ बैंक से रुपये निकालकर बाइक से जाजमऊ जा रहे थे। श्यामनगर शताब्दी उद्यान के पास दो बाइक पर सवार चार लोगों ने उनकी बाइक में टक्कर मारी और विवाद करते हुए तमंचे की बट और हेलमेट से मारकर रुपयों से भरा बैग लूट ले गए थे। घटना में दोनों लोग घायल हो गए थे।

अरशद को एलएलआर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रकरण में वासिद ने पहले 25 लाख, फिर आठ लाख रुपये लूट होने की सूचना दी, लेकिन बाद में वह घटना से मुकर गया। उसने कहा कि वह ब्लड प्रेशर का मरीज है। मारपीट करने वालों को पकड़ने के लिए उसने हड़बड़ाहट में लूट की सूचना दे दी थी। उसने तहरीर देने से भी इन्कार कर दिया था।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि मारपीट का वीडियो मिलने और घटना से मुकरने के शक पर जांच क्राइम ब्रांच को दी गई थी। इसमें साइबर सेल, क्राइम ब्रांच व थाना पुलिस की अलग अलग छह टीमें लगाई गई। एक टीम की जांच में सामने आया कि जिस बैंक से वासिद व अरशद रुपये निकालकर आने की बात कह रहे थे।

वह खाता जाजमऊ के शिवांग टेनरी के नाम पर है जिसका मालिक स्क्रैब कारोबारी महफूज है। उस दिन उस खाते से 3.20 करोड़ रुपये निकले थे, जिसमे कुछ रकम कार सवार में सवार चार लोगों को दी गई। इसके बाद बाकी रकम झकरकटी के पास एक कमरे में पहुंचाई गई। वहां कई लोगों में रुपये बांटे गए। बाकी बचे 25 लाख वासिद व अरशद बाइक से महफूज के घर लेकर जा रहे थे, जो लूट ली गई।

घटना बाद वासिद का रिशरेदार बनकर महफूज श्यामनगर चौकी भी पहुंचा और उससे न मुकदमा कराने और न ही उसका नाम लेने की बात कही। टीम ने महफूज के महफूज के पैन कार्ड और मोबाइल नंबर पता लगवाया तो सामने आया कि महफूज और उसके परिवार के 12 बैंक खातों में 68 खाते हैं, जिसमें वर्ष 2023 से 2025 तक 1600 करोड़ नकद निकाला जा चुका है। इन बैंकों में कानपुर, उन्नाव और फतेहपुर की कई फर्मो के खातों से रुपये पहुंचते हैं।

उधर, क्राइम ब्रांच की दूसरी टीम लुटेरों की तलाश में लगी थी। देर रात क्राइम ब्रांच ने चकेरी के अहिरवां में हिरामन का पुरवा के यासीन और मुजाहिद को मुठभेड़ में गोली मारकर गिरफ्तार किया। इसके बाद निशानदेही पर उनके साथी लारेब, जीशान को पकड़ा। इन चारों के बाद देर रात ही रेकी करने वाले रहमान और शुभान को भी दबोच लिया। उनके पास से 10.73 लाख रुपये, तमंचा आदि बरामद हुआ। हालांकि महफूज फरार है। घटना के बाद से उसकी व अन्य साथियों की लोकेशन जामा मस्जिद, कश्मीर, नेपाल में लोकेशन मिली थी।

आरोपितों को क्राइम ब्रांच शुक्रवार को कोर्ट पेश करने ले जा रही है। पुलिस आयुक्त ने इस प्रकरण में हवाला और देश विरोधी गतिविधियों में रुपये इस्तेमाल होने की आशंका जता जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं बैंक के अधिकारियों की संलिप्तता की जांच के लिए आरबीआइ, इनकम टैक्स, जीएसटी विभाग व ईडी से भी जांच कराने के लिए पत्राचार करने की बात कही है।

घटना के बाद भी एक करोड़ रुपये बैंक से निकाले गए

क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि लूट की घटना के बाद भी महफूज के खाते से एक करोड़ रुपये निकले थे। वह तब से फरार है, लेकिन उसने कोर्ट से जानकारी मांगी है कि क्या वह शहर के किसी भी थाने से वांछित तो नहीं है। टीम उसकी तलाश में लगी है।

महफूज के लिए काम करने वाले युवक का दोस्त निकला एक लुटेरा

पुलिस आयुक्त ने बताया कि महफूज के रुपये बैंक से निकाल कर लोगों तक पहुंचाने के लिए वासिद और अरशद अरुण सोनी समेत कई लोग काम करते हैं। अरुण का दोस्त लुटेरों के गिरोह का रहमान है। जब रहमान को पता चला कि इतने ज्यादा रुपये लेकर लोगों को पहुंचाते हैं जो अवैध तरह के कमाए रुपये हैं तो उसने अपने साथियों के साथ मिलकर वासिद और अरशद को लूटने की योजना बना डाली। अक्टूबर 2025 में भी गिरोह ने दूसरे साथियों के साथ लूट की थी, लेकिन उस समय न पुलिस को सूचना दी गई और न मुकदमा लिखवाया जग था, जिससे कोई कार्रवाई नहीं हुई। लूट के लिए एक महीने तक वासिद-अरशद की पूरी रेकी रहमान और शुभान ने की। यहाँ तक अपने ही साथी लुटेरों की भी रेकी की। जिससे पता चल सके कि उन लोगों ने लूट या नहीं। अगर लूट की तो झूठ तो नहीं बोल देंगे कि लूट नहीं सके।