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हरियाणा में तेज हुआ सियासी शीर्षासन

हरियाणा में सियासी शीर्षासन फिर से शुरू हो चुका है। नेता अभी लोकसभा चुनाव के दौरान तमाम प्रकार के योगासन करके जहां थकान मिटा रहे हैं वहीं विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों ने उन्हें फिर से चुनावी योग के लिए चटाई बिछाने को मजबूर कर दिया है। विपक्ष पस्त होकर लगभग निद्रा की मुद्रा में है, वहीं भाजपा ने अपनी चुस्ती फुरती का परिचय देते हुए फिर से कमर कस ली है। रोहतक में राज्य स्तरीय योग समारोह के बहाने केंद्रीय गृह मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने हरियाणा सरकार और पार्टी की चुनावी तैयारियों का जायजा ले लिया। शाह ने इस दौरान फिर गुरुमंत्र दिया वहीं फोकस एरिया भी बता गए। हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहले से सक्रिय हैं, लेकिन शाह के दौरे के बाद उन्होंने भी तेज गति हासिल कर ली है। रोहतक में ही उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। जाहिर है, जो पहल करता है वही खत्म भी करता है और भाजपा की यही रणनीति है।

शाह के हरियाणा पर फोकस का मतलब अभी लोकसभा चुनाव में पार्टी की ओर से यहां सभी 10 सीटों पर जीत हासिल करने से लगाया जा सकता है। पार्टी ने इस चुनाव में जहां मजबूत विरोधी नेताओं को अपने पाले में किया वहीं नौकरशाहों पर भी दांव खेला। अब विधानसभा चुनाव में भी उसकी रणनीति कुछ ऐसी ही रह सकती है। पस्त हौसले के साथ विपक्ष के नेता भाजपा के खिलाफ खड़े होने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इसी वजह से भाजपा नेता यह कहते सुने जा सकते हैं कि सत्ता चलाने का मजा बगैर मजबूत विपक्ष के नहीं मिल सकता। जाहिर है, यह तंज हरियाणा में विपक्ष की हालत बयान कर देता है। खैर, पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव में भी रोहतक ही केंद्र बिंदु रहने वाला है। इसके बाद सोनीपत, हिसार और सिरसा जिलों पर ध्यान केंद्रित रहेगा, हाईकमान ने राज्य में 75 सीटों का लक्ष्य तय कर दिया है और अब इसी लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाए, इस पर मंथन जारी है।

हालांकि पार्टी के नेता 75 सीटों पर जीत को इतना आसान भी नहीं मान रहे। विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव से एकदम अलग होते हैं, इस बार लोकसभा चुनाव में मतदाताओं को यह कहते सुना गया है कि वे बड़ी वोट लोकसभा चुनाव मोदी को देने पर विचार कर रहे हैं और छोटी वोट यानी विधानसभा चुनाव स्थानीय नेताओं को देखकर देंगे। ऐसे में छिन्न-भिन्न विपक्ष को यह बात आशा की किरण नजर आ रही है। इस बार विपक्ष के कई नेताओं के लिए यह चुनाव आर या पार की लड़ाई होने वाला है, उनका पूरा जोर भाजपा को नुकसान पहुंचाना होगा। ऐसे में वे जहां धुर विरोधियों से हाथ मिलाने में गुरेज नहीं करेंगे वहीं भाजपा को रोकने के लिए एक मंच पर भी आ सकते हैं। इनेलो सुप्रीमो ने कांग्रेस नेताओं की तारीफ कर कुछ संकेत दिए हैं, वहीं जजपा ने आप के साथ बने रहने का ऐलान किया है। हालांकि लोसुपा और बसपा अलग हो चुके हैं, लेकिन चुनाव के और नजदीक आने तक संभव है प्रदेश में नया गठबंधन सिर उठा ले।

इन्हीं बातों के ध्यान में रखते हुए शाह ने जहां प्रदेश के जोन तैयार कर उनकी जिम्मेदारी पार्टी नेताओं को सौंपी है, वहीं पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी न करने को भी कहा है। दरअसल, यह बात तब कही गई जब शाह को बताया गया कि दूसरी पार्टियों से नेता भाजपा में आना चाहते हैं। उनका यही कहना था कि पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं को दरकिनार न किया जाए वहीं बाहर से जिन्हें भी जॉइन कराया जाए वे स्वच्छ छवि के हों। इसके अलावा टिकटों के वितरण में भी विभिन्न चरणों पर मंथन के बाद फैसले की बात कही गई है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सितंबर में पार्टी के चुनाव अभियान की खोज खबर लेने के लिए हरियाणा आ सकते हैं। भाजपा की चुनावी तैयारियों में सरकार की ओर से नौकरियों के लिए निकाले जा रहे आवेदन भी शुमार हो गए हैं। सरकार जितनी तत्परता से इस दिशा में काम कर रही है, उससे तय है कि विधानसभा चुनाव से पहले हजारों युवा सरकारी कार्यालयों में अपनी नौकरी शुरू कर चुके होंगे। अब वक्त बताएगा कि प्रदेश की जनता को भाजपा का राज कितना रास आया है।

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