Haryana Cuts Pending Land
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हरियाणा में भूमि रिकॉर्ड सुधार का बड़ा असर, दाखिल-खारिज के लंबित मामलों में 90% से अधिक कमी

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Haryana Cuts Pending Land

हरियाणा सरकार ने भूमि अभिलेख प्रशासन को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) प्रणाली में व्यापक सुधार लागू किए हैं। इन सुधारों का असर यह हुआ है कि पिछले छह महीनों में राज्यभर में लंबित दाखिल-खारिज मामलों की संख्या में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त Sumita Mishra ने बताया कि यह पहल राजस्व सेवाओं की डिलीवरी में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है और इसका उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।

उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया के तहत पुराने दाखिल-खारिज रिकॉर्ड को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया गया है। इस डिजिटलीकरण से अधिकारियों को जिलावार मामलों की वास्तविक समय (Real-Time) में निगरानी करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिली है।

विभाग के अनुसार, पहले राज्यभर में लगभग 5 लाख दाखिल-खारिज मामले लंबित थे, जो अब घटकर करीब 50 हजार रह गए हैं। शेष मामलों के निपटान के लिए विशेष 10 दिवसीय अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता राज्यव्यापी स्वतः दाखिल-खारिज (Auto Mutation) प्रणाली है। अब हरियाणा में कहीं भी किसी संपत्ति का पंजीकरण होते ही उससे संबंधित दाखिल-खारिज प्रविष्टि राजस्व रिकॉर्ड में स्वतः दर्ज हो जाएगी। इससे नागरिकों को अलग से आवेदन देने या राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।

अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल समय और श्रम की बचत होगी, बल्कि संपत्ति स्वामित्व से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी। पंजीकरण और राजस्व रिकॉर्ड के एक साथ अपडेट होने से भूमि अभिलेखों की सटीकता बढ़ेगी और पुराने रिकॉर्ड के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर भी नियंत्रण मिलेगा।