GST Council meeting for the first time in Chandigarh, see which items may attract GST

चंडीगढ़ में पहली बार जीएसटी काउंसिल की बैठक, देखें किन-किन वस्तुओं पर लग सकता है जीएसटी

GST-Meeting

GST Council meeting for the first time in Chandigarh, see which items may attract GST

एलईडी बल्ब, दही-लस्सी भी आ सकती हैं जीएसटी के दायरे में 

चंडीगढ़/साजन शर्मा

चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक प्राइवेट होटल में पहली बार जीएसटी काउंसिल की 47वीं बैठक (जो केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हो रही है) में रोजमर्रा की खाने पीने की वस्तुओं पर जीएसटी की दर बढ़ सकती है। पहले सिर्फ ब्रांडेड आटे पर ही जीएसटी लगता था लेकिन अब हर पैकिंग वाले आटे पर भी जीएसटी लगने का प्रस्तावित है। इसी तरह दही और लस्सी पर भी जीएसटी लग सकता है। वहीं होटलों में एक हजार रुपये से कम कमरों के किराए पर भी जीएसटी लगना प्रस्तावित है। इसी प्रकार एलईडी बल्ब पर भी जीएसटी लगाने की पूरी संभावना है।


जानकारी के अनुसार, मंगलवार को हुई बैठक में करीब 31 राज्यों के वित्त मंत्री शामिल थे। बैठक में जीएसटी स्लैब में बदलाव करने को लेकर खूब चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई। अधिकतर राज्य व यूटी के प्रतिनिधि मौजूदा जीएसटी स्लैब के हक में हैं। बता दें मौजूदा चार जीएसटी स्लैब हैं जिसमें 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी शामिल हैं। बैठक में 31 राज्यों के वित्त मंत्रियों के अलावा चंडीगढ़ के वित्त सचिव विजय नाम देवराज जादे भी शामिल हुए। 

यहां बता दें कि 18 फीसदी के स्लैब में 480 आइटम हैं, जिनमें से करीब 70 फीसदी जीएसटी संग्रह आता है। सूत्रों की मानें तो जीएसटी स्लैब में कोई बदलाव नहीं करने की योजना है लेकिन कुछ आइटमों को जीएसटी के दायरे में लाया जा रहा है। जिनमें दही, लस्सी, एलईडी बल्ब, पैकिंग आटा, होटलों में एक हजार के बिल वाले रूम इत्यादि शामिल हैं। इसी प्रकार ऑनलाइन गेमिंग, क्रिप्टोकरंसी, लॉटरी और कैसीनो पर 28 फीसदी जीएसटी लगना लगभग तय है। इसके अलावा टैक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़ी कई वस्तुओं पर जीएसटी की दरें बढ़ाई जा सकती हैं।

क्षतिपूर्ति जारी रखने को लेकर लाया गया प्रस्ताव

कई राज्यों के प्रतिनिधि और विपक्ष की ओर से जीएसटी काउंसिल की बैठक में क्षतिपूर्ति जारी रखने को लेकर प्रस्ताव लाया गया। इसमें केरल, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्य शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, 30 जून को केंद्र सरकार द्वारा विशेष राज्यों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति की समय-सीमा समाप्त हो रही है, ऐसे में कई राज्य इसका विरोध कर सकते हैं। यहां बता दें कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने यह फैसला किया था कि वैट समाप्त करने पर उसकी भरपाई के लिए अगले पांच साल तक क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी। क्षतिपूर्ति को पूरा करने के लिए तंबाकू, सिगरेट, महंगी बाइक और कार जैसे कई वस्तुओं पर अतिरिक्त सेस लगाए गए। क्षतिपूर्ति के नाम पर लिए जाने वाले सेस 30 मार्च 2026 तक जारी रहेंगे।


विमान ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, काउंसिल की बैठक में विमान ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाए जाने पर भी चर्चा हुई। सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल को वस्तु एवं सेवा कर में शामिल कर सकती है। सरकार इसमें वैट या एक्साइज के साथ जीएसटी भी लगा सकती है। बताया जा रहा है कि बैठक में विमान ईंधन पर 18 फीसदी जीएसटी लगाए जाने पर मोहर लग सकती है।

 

ऑर्थोसेस भी न्यूनतम स्लैब में आए

कृत्रिम अंगों और ऑर्थोपेडिक इंप्लांट पर (ट्रॉमा, स्पाइन और ऑर्थोप्लास्टी इंप्लांट) पर एक समान 5 प्रतिशत जीएसटी दर है। इसी  तर्ज पर ऑर्थोसेस (स्प्लिंट्स, ब्रेसेस, बेल्ट और कैलीपर्स) को भी 5 प्रतिशत के न्यूनतम ब्रैकेट में शामिल किए जाने को लेकर काउंसिल की बैठक में प्रस्ताव लाया गया। यानि फैसले के बाद आर्थोसेस पर भी आर्थोपेडि़क इंप्लांट व कृत्रिम अंगों की तरह 5 फीसदी जीएसटी लगा करेगा। इनमें कई कृत्रिम अंग या उससे जुड़ी सेवा 12 और पांच फीसदी के दायरे में है। इन सभी को न्यूनतम जीएसटी स्लैब पांच फीसदी के दायरे में शामिल करने को लेकर प्रस्ताव लाया गया।

ये मुद्दे भी उठे

हिमाचल प्रदेश की ओर से रोपवे पर जीएसटी 18 से पांच फीसदी किए जाने की मांग की गई। टेटरा पैक पर जीएसटी 12 से 18 फीसदी किए जाने पर भी चर्चा हुई। होटल में एक हजार रुपए से कम किराए व ढ़ाबे पर एक हजार से कम के बिल पर भी जीएसटी देना पड़ सकता है। आटे, दही, लस्सी, एलईडी बल्ब पर जीएसटी की दर लग सकती है या बढ़ाई जा सकती है। वहीं पाउच, स्टोमा चिपकने वाला पेस्ट, बैरियर क्रीम, सिंचाई किट,बेल्ट, माइक्रो-पोर टेप सहित वस्तुओं पर जीएसटी दर को 12 फीसदी से घटा।