गया एयरपोर्ट का नाम बदला, अब ‘गया जी हवाई अड्डा’ के नाम से होगी पहचान

गया एयरपोर्ट का नाम बदला, अब ‘गया जी हवाई अड्डा’ के नाम से होगी पहचान

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Gaya Airport renamed, now known as 'Gaya Ji Airport'

बोधगया। बिहार की धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय पहचान से जुड़े गया शहर को अब नई आधिकारिक पहचान मिलने लगी है।

गया हवाई अड्डा का नाम बदलकर अब 'गया जी हवाई अड्डा' कर दिया गया है। एयरपोर्ट परिसर में पुराने होल्डिंग और बैनर हटाकर नए बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जिन पर बड़े अक्षरों में गया जी हवाई अड्डा लिखा हुआ दिखाई दे रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 16 मई 2025 को बिहार सरकार की कैबिनेट ने प्रस्ताव पास करते हुए आधिकारिक तौर पर गया शहर का नाम बदलकर 'गया जी' करने का आदेश आ गया था।

हेडक्वार्टर से मिली मंजूरी

इसके बाद एयरपोर्ट प्रबंधन को दिल्ली स्थित मुख्यालय से आदेश मिलने का इंतजार था। अब एयरपोर्ट हेडक्वार्टर से स्वीकृति मिलने के बाद नाम परिवर्तन की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है।

Gaya Ji Airport

 

गया हवाई अड्डा के कार्यवाहक निदेशक अवधेश कुमार ने बताया कि बिहार सरकार से नोटिफिकेशन प्राप्त होने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन ने प्रस्ताव दिल्ली मुख्यालय को भेजा था। पांच महीने पहले मुख्यालय से आदेश मिला कि एयरपोर्ट का नाम गया जी हवाई अड्डा किया जाए।

इसके बाद अब एयरपोर्ट परिसर में लगे पुराने बैनर और होल्डिंग हटाकर नए नाम वाले बोर्ड लगाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बिहार का दूसरा सबसे व्यस्त एयरपोर्ट माना जाता है।

वर्ष 2002 में शुरू हुआ यह एयरपोर्ट बोधगया आने वाले देश-विदेश के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख केंद्र है। यह बोधगया से लगभग 7 किलोमीटर और गया शहर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

आगे चलेंगे बड़े विमान

एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर भी लगातार योजनाएं बनाई जा रही हैं। बड़े विमानों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए रनवे और अन्य सुविधाओं के विस्तार पर काम चल रहा है।

वहीं, बिहार कैबिनेट ने कैट-I लाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण को मंजूरी दी है, जिससे रात के समय विमानों की लैंडिंग और अधिक सुरक्षित एवं सुगम हो सकेगी।

हालांकि, राज्य सरकार ने अभी तक जमीन एयरपोर्ट को हैंड ओवर नहीं की है।संभवत दो महीने के अंदर अधिग्रहित जमीन एयरपोर्ट प्रबंधन को सौंप सकती है।

गया से गया जी तक का यह बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि शहर की धार्मिक, सांस्कृतिक और वैश्विक पहचान को नई गरिमा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।