'पापा माफ कर देना, मैं पढ़ना चाहती थी', आखिरी खत और 8वीं की छात्रा ने यूं खत्म कर ली जिंदगी

'पापा माफ कर देना, मैं पढ़ना चाहती थी', आखिरी खत और 8वीं की छात्रा ने यूं खत्म कर ली जिंदगी

Capture student sucide in baghpat

Forgive me, Papa, I wanted to study

Forgive me, Papa, I wanted to study: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक 15 वर्षीय छात्रा ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है. छात्रा की जेब से मिला एक भावुक सुसाइड नोट उसकी मानसिक पीड़ा और पढ़ाई के प्रति उसके जुनून को बयां कर रहा है.

परिजनों के अनुसार, दोपहर करीब दो बजे आरती (परिवर्तित नाम) ने घर में सामान्य व्यवहार करते हुए सभी सदस्यों को प्यार से चाय बनाकर पिलाई. चाय पिलाने के बाद उसने कहा कि उसे नींद आ रही है और वह सोने के लिए अपने कमरे में चली गई. एक घंटे बाद जब वह नहीं जागी, तो घरवाले उसे उठाने पहुंचे, जहां वह अचेत अवस्था में मिली.

अस्पताल में टूटा दुखों का पहाड़

परिजन आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल लेकर दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय प्रकाश ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों ने छात्रा द्वारा जहरीला पदार्थ निगलने की आशंका जताई है.

“पापा मुझे माफ कर देना”

पुलिस को छात्रा की जेब से तीन पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने अपनी अधूरी ख्वाहिशों और दर्द का जिक्र किया है. छात्रा ने लिखा, ‘मैंने गलती की थी, मुझे अपनी गलती का पछतावा था. मैंने माफी मांगी, पर किसी ने मेरी नहीं सुनी. मुझे पढ़ाई करनी थी, पर सबने मना कर दिया. इसलिए मैं जीना नहीं चाहती. पापा मुझे माफ कर देना.’

पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम

शहर कोतवाली पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. हालांकि, शुरुआत में परिजनों ने बीमारी से मौत की बात कही थी, लेकिन सुसाइड नोट मिलने के बाद मामला पूरी तरह बदल गया है. जांच अधिकारी ने कहा- शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चलेगा. सुसाइड नोट के आधार पर परिवार और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है कि आखिर किस गलती और पढ़ाई को लेकर छात्रा दबाव में थी.

गांव में शोक की लहर

छात्रा की मौत की खबर से गांव में मातम पसरा हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि वह पढ़ने में बहुत होशियार थी और हमेशा खुश रहती थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि सबके चेहरे पर मुस्कान लाने वाली बेटी के मन में इतना बड़ा दुख छिपा है.