पेड़ काटने पर एक्शन ना लेने के अवज में रिश्वत लेने के आरोपी फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जूनियर असिस्टेंट को 4 साल की कैद

पेड़ काटने पर एक्शन ना लेने के अवज में रिश्वत लेने के आरोपी फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के जूनियर असिस्टेंट को 4 साल की कैद

Forest Department Junior Assistant Accused

Forest Department Junior Assistant Accused of Accepting

-चंडीगढ़ विजलेंस ने करीब 11 साल पहले 2015 में 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हांथ किया था गिरफ्तार

चंडीगढ़,24 मार्च: जिला अदालत ने रिश्वत लेने के 11 वर्ष पुराने मामले में चंडीगढ़ वन विभाग के   के पद पर तैनात जूनियर  असिस्टेंट अमृतपाल सिंह को दोषी करार देते हुए 4 साल कैद की सजा सुनाई । एक दशक से ज्यादा पुराने इस मामले में दोषी पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। दोषी पर एक व्यक्ति से अवैध रूप से पैसे मांगने और लेने का आरोप था। अभियोजन पक्ष के अनुसार जांच के दौरान दोषी के हाथ और कपड़ों की जेब के नमूनों में रासायनिक परीक्षण के जरिए रिश्वत के प्रमाण मिले। खुड्डा अलीशेर क्षेत्र में लकड़ी का काम करने वाले कारोबारी कल्याण सिंह ने उप-वन संरक्षक अमृतपाल सिंह के खिलाफ चंडीगढ विजिलेंस को शिकायत दी थी। शिकायत में लकड़ी कारोबारी की ओर से लगाए गए आरोपों के तहत आरोपी पेड़ों की कटाई के मामले में कार्रवाई न करने के बदले पहले 70-80 हजार रुपये की मांग कर रहा था। जिस पर कार्रवाई करते हुए विजिलेंस 29 जून 2015 को ट्रेप लगा दोषी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।

ऑडियो रिकार्डिंग और फॉरेंसिक रिपोर्ट बनी मुख्य अधार...

अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर दोषी के खिलाफ आरोप साबित किए। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए साजिश के तहत फंसाए जाने का दावा किया, खुद को बैकसूर बताते हुए कहा कि उसने अपने विभाग को अवैध पेड़ों के बारे में सूचित कर दिया था। उसने शिकायतकर्ता से कभी भी संपर्क नहीं किया और ना ही रिश्वत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलें को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध लाभ लिया और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध किया। इसके साथ ही अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाने का आदेश जारी किया।

क्या था मामला....

दर्ज मामले के तहत करीब 11 पहले जून 2015 में खुड़ा अलीशेर गांव के रहने वाले लकड़ी व्यापारी कल्याण सिंह ने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के एक कर्मचारी पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाते हुए चंडीगढ़ विजिलेंस को शिकायत दी थी। शिकायत में  पीड़ित ने बताया कि वह कई सालों से लकड़ी का कारोबार करते आ रहा है। उसने अपने घर के बगल ही रहने वाली प्लॉट की मालकिन पुनीत शर्मा से 85 हजार में पेड़ खरीदे थे। 28 जून 2015 को सुबह करीब 11 बजे अमृतपाल सिंह नामक व्यक्ति उनकी दुकान पर आया और खुद को फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का कर्मचारी बताया। उसने धमकी दी कि बिना अनुमति पेड़ काटने के मामले में वह उनके खिलाफ केस दर्ज करवा सकता है, जिसमें 7 साल तक की सजा हो सकती है। इस कार्रवाई से बचाने के लिए उसने 1 लाख की रिश्वत मांगी। बाद में फोन पर बातचीत के दौरान उसने रकम घटाकर 70–80 हजार करने की बात कही। उसी दिन शाम करीब 6 बजे करीब वह फिर दुकान पर आया, जहां कल्याण सिंह ने उसे 5 हजार रुपये दे दिए। आरोपी ने बाकी पैसे अगले दिन लेने की बात कही। इस दौरान शिकायतकर्ता ने आरोपी से हुई बातचीत रिकॉर्ड कर ली और चंडीगढ़ विजिलेंस विभाग को शिकायत दे दी। जिस पर कार्रवाई करते हुए विजिलेंस ने दोषी अमृतपाल को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार करते हुए उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज कर कोर्ट में  चालान पेशन किया था। मामले में सामने आए तथ्यों को जांचने और दलीलों को सूनने के बाद अदालत ने दोषी