फ्लाइट रद्द होने की सूचना न देना पड़ा भारी : एयर इंडिया और अलहिंद टूर्स एंड ट्रेवल्स पर जुर्माना
Failure to Notify of Flight Cancellation Proves Costly
चंडीगढ़: Failure to Notify of Flight Cancellation Proves Costly: फ्लाइट कैंसिल होने की सूचना यात्री को न देना एयर इंडिया और अलहिंद टूर्स एंड ट्रेवल्स को भारी पड़ गया। स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन, चंडीगढ़ ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में दोनों को सेवाओं में कोताही (डिफिशिएंसी इन सर्विस) का दोषी ठहराते हुए संयुक्त रूप से करीब 1.35 लाख रुपये का हर्जाना और जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है।
कमीशन ने स्पष्ट किया कि फ्लाइट रद्द होने की स्थिति में यात्री को समय पर सूचित करना केवल एयरलाइन ही नहीं, बल्कि टिकट बुक करने वाले ट्रेवल एजेंट की भी समान जिम्मेदारी है।
मामले का विवरण
प्रोफेशनल कंसल्टेंट एवं शिकायतकर्ता सोहेल भसीन को 21 मई 2022 को शारजाह में एक अहम बिजनेस मीटिंग में शामिल होना था। इसके लिए उन्होंने 20 मई 2022 की फ्लाइट की टिकट अलहिंद टूर्स एंड ट्रेवल्स के माध्यम से बुक करवाई थी।
हालांकि, जब वह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि उनकी फ्लाइट पहले ही रद्द की जा चुकी है और उन्हें इस संबंध में कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।
मजबूरी में दूसरी फ्लाइट की टिकट ली
फ्लाइट रद्द होने की अचानक जानकारी मिलने पर शिकायतकर्ता को मजबूरी में दूसरी फ्लाइट की टिकट खरीदनी पड़ी, जिसके लिए उन्हें लगभग 6,075 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े।
इसके बावजूद देरी से पहुंचने के कारण वह अपनी महत्वपूर्ण मीटिंग में शामिल नहीं हो सके, जिससे उन्हें पेशेवर तौर पर भी नुकसान उठाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
एयर इंडिया ने कहा कि उसने नियमानुसार टिकट का पैसा रिफंड कर दिया था और फ्लाइट रद्द होने की सूचना ट्रेवल एजेंट को दे दी थी।
वहीं, अलहिंद टूर्स एंड ट्रेवल्स ने दलील दी कि टिकट उसकी दुबई शाखा से बुक की गई थी, जो एक अलग कानूनी इकाई है, इसलिए वह जिम्मेदार नहीं है।
कमीशन की सख्त टिप्पणी
कमीशन की पीठ, जिसमें राज शेखर अत्री (अध्यक्ष) और प्रीतिंदर सिंह (सदस्य) शामिल थे, ने दोनों पक्षों की दलीलों को खारिज कर दिया।
कमीशन ने कहा कि:
फ्लाइट संचालन एयरलाइन की जिम्मेदारी है,
जबकि टिकट बेचने और यात्री से भुगतान लेने वाले एजेंट का भी “ड्यूटी ऑफ केयर” बनता है।
दोनों के पास यात्री की संपर्क जानकारी होती है, इसलिए आंतरिक व्यवस्थाओं का हवाला देकर उपभोक्ता को असुविधा में नहीं छोड़ा जा सकता।
कमीशन ने जिला उपभोक्ता आयोग के पूर्व फैसले में संशोधन करते हुए एयर इंडिया को भी दोषी माना। अपने आदेश में कमीशन ने निर्देश दिया कि:
अतिरिक्त किराया 6,075 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाया जाए,
मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए 1,00,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए,
मुकदमे का खर्च 35,000 रुपये अदा किया जाए।