Saturday, September 21, 2019
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आरबीआई की घोषणा से मिली राहत

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में रेपो रेट को घटाकर अर्थव्यवस्था की उड़ान को और तेज कर दिया है। ऐसा लंबे समय बाद हो रहा है, जब बैंक ने इसके संकेत दिए हैं कि अर्थव्यवस्था पटरी पर है और अब महंगाई को मात देने का वक्त आ गया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में कटौती लाकर मध्यम वर्ग को बड़ी राहत प्रदान की है। रेपो रेट में चौथाई फीसदी यानी 25 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद यह रेट 6.50 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी हो गया है। इससे पहले आरबीआई ने ब्याज दर में कमी अगस्त 2017 में की थी। अब नए गवर्नर शक्तिकांत दास के कार्यभार संभालने के बाद आरबीआई ने इस दिशा में फैसला लिया है। वास्तव में आरबीआई की ओर से रेपो रेट में कमी का आम उपभोक्ता को इसी तरह इंतजार रहता है जैसे शादी के वक्त दुल्हन के घरवाले बारात का करते होते हैं। ब्याज दरों में कटौती से घर, गाड़ी और अन्य कार्यों के लिए लोन की चाहतें बढ़ जाती हैं, अपने बजट और अपनी पहुंच में ब्याज दरों को पाकर आम आदमी की चाल तेज हो जाती है।

दरअसल, मोदी सरकार के सभी फैसले आजकल आम आदमी, किसान और युवाओं को समर्पित नजर आते हैं। आम चुनाव का बिगुल बजने को कुछ समय ही बाकी है, देश ने अभी अंतरिम बजट में छूट और नई योजनाओं के आगाज का लुत्फ उठाया है, अब आरबीआई की ओर से रेपो रेट में कटौती से और राहत मिली है। गौरतलब है कि पूर्व वित्त सचिव शक्तिकांत दास को बीते दिसंबर में यह जिम्मेदारी दी गई थी, तब ऐसी बातें सामने आ रही थी कि वे केंद्र की मर्जी के अनुरूप ब्याज दरों में ढील देंगे या कमी लाएंगे। वास्तव में चुनावी वर्ष में लोन सस्ता होना सीधे-सीधे आम आदमी को आनंदित करता है और इसके बाद उसका आनंद सरकार के पक्ष में वोट के रूप में ढल जाता है। वैसे आरबीआई की ओर से अभी लिया गया फैसला ऐसे नहीं देखा जाना चाहिए कि मौजूदा सरकार को फायदा पहुंचाया जा रहा है। 6 सदस्यों की मौद्रिक नीति समिति ने आम राय से यह फैसला लिया। आरबीआई गवर्नर महज भारतीय नहीं अपितु दुनिया की अर्थव्यवस्था को भांप कर इस नतीजे पर पहुंचे। अभी दुनिया में कच्चे तेल की कीमत का रुझान स्थिर रहने या नीचे जाने का है। वहीं ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध से कच्चे तेल की किल्लत पैदा होने की आशंका थी, लेकिन अमेरिका ने नरमी दिखाई तो यह खत्म हो गई।

अगर दुनिया की अर्थव्यवस्था को देखा जाए तो अमेरिकी रिजर्व बैंक फेड ने अपनी दरें बढ़ाने को लेकर कोई तत्परता नहीं दिखाई है, इस वजह से डॉलर भी तेजी से महंगा नहीं हो रहा। वहीं भारत समेत पूरी दुनिया में खाने-पीने की वस्तुओं का सस्ता होना और राहत की बात है। चीन और दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का सुस्त पडऩा एक अलग बात है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था अभी ऐसे दौर से दूरी बनाए हुए है। अंतरिम बजट और मोदी सरकार की ओर से लिए गए किसानों आदि के संबंध में लिए गए बड़े फैसले अर्थव्यवस्था को जीवंत बनाए हुए हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद 7.2 फीसदी आंका है। इस बार फरवरी के महीने में अच्छी बारिश हुई है, जिससे मैदानी इलाकों में गेहूं की बेहतर फसल होने की संभावना जाहिर की जा रही है। अच्छी फसल होना अच्छी अर्थव्यवस्था की निशानी है। खुदरा और थोक वस्तुओं की कीमतें भी नियंत्रित हैं।

गौरतलब है कि आरबीआई ने किसानों को तोहफा देते हुए बिना गारंटी के मिलने वाले लोन की सीमा को बढ़ा दिया है। पहले यह सीमा एक लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 1.60 लाख रुपये कर दिया गया है। इस तरह से किसानों के लिए यह दोहरे फायदे की बात है, अच्छी बारिश और लोन की सीमा में इजाफा अर्थव्यवस्था की ग्रोथ बढ़ाएगा। वैसे रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। अब बारी बैंकों की है, उनकी तरफ से यह राहत आगे बढ़ाई जाएगी या नहीं, यह देखना होगा। हालांकि सरकारी क्षेत्र के बैंक ऐसी राहत को तुरंत अपने उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं, इस दिशा में एसबीआई ने कदम भी बढ़ा दिए हैं। बैंक ने 30 लाख रुपए तक के सभी आवास ऋणों पर ब्याज दर में 0.05 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की है। एसबीआई सार्वजनिक क्षेत्र का पहला बैंक ने जिसने इसकी घोषणा की है। अब देखना है कि निजी क्षेत्र के बैंक कब ब्याज दरों में कमी लाएंगे।

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