धनबाद सियासत: अशोक मंडल की AITUC में एंट्री; ढुलू महतो की मौजूदगी ने दिए 'घर वापसी' के संकेत

धनबाद सियासत: अशोक मंडल की AITUC में एंट्री; ढुलू महतो की मौजूदगी ने दिए 'घर वापसी' के संकेत

Dhanbad Politics: Ashok Mandal Joins AITUC

Dhanbad Politics: Ashok Mandal Joins AITUC

धनबाद। निरसा के अशोक मंडल तीन मई को धनबाद के भाजपा सांसद ढुलू महतो की उपस्थिति में All India Trade Union Congress (AITUC) में शामिल होंगे। इसे लेकर धनबाद भाजपा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मंडल के इस कदम को भाजपा में वापसी की राह के तौर पर देखा जा रहा है।

निरसा के गुरुद्वारा में तीन मई को होने वाला कार्यक्रम महज एक संगठनात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि कोयलांचल की राजनीति में नई चाल के रूप में देखा जा रहा है। अशोक मंडल का All India Trade Union Congress से संबद्ध यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन (यूसीडब्ल्यूयू) में शामिल होना कई संकेत दे रहा है। 

ढुलू महतो की रणनीति के मायने

इस पूरे घटनाक्रम को धनबाद के सांसद ढुलू महतो की मौजूदगी और सक्रियता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। 2024 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद ढुलू महतो लगातार क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लोकसभा क्षेत्र में मिल रही चुनौतियों को देखते हुए वे जमीनी स्तर पर नए लोगों और प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

अशोक मंडल का सियासी सफर

अशोक मंडल का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्ष 2000 से 2011 तक भाजपा में सक्रिय रहकर उन्होंने संगठन को मजबूत किया और जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई। इसके बाद उन्होंने Jharkhand Mukti Morcha का दामन थामा। निरसा विधानसभा से कई बार चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें स्थायी सफलता नहीं मिली, लेकिन क्षेत्र में उनका जनाधार आज भी मजबूत माना जाता है।

बदले समीकरण और भविष्य की संभावनाएं

2024 के विधानसभा चुनाव में झामुमो द्वारा सीट भाकपा माले के लिए छोड़ने के बाद मंडल ने जेएलकेएम के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। अब यूनियन से जुड़ने के फैसले को उनकी नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि मजदूर राजनीति के जरिए वे फिर से अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, जो आगे चलकर मुख्यधारा की राजनीति में वापसी का रास्ता भी खोल सकता है।

बैकडोर राजनीति की चर्चा तेज

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह जुड़ाव सिर्फ यूनियन तक सीमित नहीं रहेगा। ढुलू महतो की मौजूदगी और सक्रिय भूमिका को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि अशोक मंडल भविष्य में भाजपा के करीब आ सकते हैं। यानी यूनियन की राजनीति के जरिए बैकडोर एंट्री की यह रणनीति आने वाले दिनों में कोयलांचल की सियासत में नए समीकरण गढ़ सकती है।