असम चुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी शिल्पी नेहा तिर्की ने जनता में निराशा और बदलाव की मांग जताई
Congress Candidate Shilpi Neha Tirki Highlights
रांची। असम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को प्रचार करने डिब्रूगढ़ पहुंचीं कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि पिछले एक सप्ताह के दौरान असम के विभिन्न जिलों के दौरे और चाय बागान क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क के बाद यह स्पष्ट दिख रहा है कि राज्य की जनता इस बार सत्ता परिवर्तन का मन बना लिया है।
आम नागरिकों, विशेषकर चाय बागान श्रमिकों के बीच व्यापक असंतोष है और वे एक साफ-सुथरी, पारदर्शी एवं जवाबदेह सरकार की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जनता से संवाद के दौरान स्पष्ट हुआ कि लोग विकल्प के रूप में गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार को असम में स्थापित करना चाहते हैं।
बीजेपी की सरकार से लोगों में निराशा
पिछले दस वर्षों में भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा किए गए वादों के विपरीत जमीनी स्तर पर लोगों को निराशा और शोषण का सामना करना पड़ा है।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने वर्ष 2022 में असम फिक्सेशन ऑफ सीलिंग आन लैंड होल्डिंग एक्ट, 1956 में किए गए संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि चाय बागानों की 10 प्रतिशत भूमि को व्यावसायिक उपयोग के लिए खोल दिया गया।
सरकार के तर्क के विपरीत चाय बागान श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसके परिणामस्वरूप कई चाय बागानों में रिसार्ट, होटल और वाणिज्यिक परिसरों का निर्माण हो रहा है, जिससे श्रमिकों का विस्थापन और बेरोजगारी बढ़ रही है।
उन्होंने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और कार्बी आंगलोंग के बीच स्थित हातीखुली टी-एस्टेट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी चाय बगान की भूमि को व्यावसायिक उपयोग के लिए दिए जाने से स्थानीय लोग प्रभावित हुए हैं और आंदोलनरत हैं।
पैसे देकर कर रहे प्रभावित
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों के खातों में धनराशि स्थानांतरित कर मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।
इसी वर्ष 26 जनवरी को इति खोली, दूति पात योजना के तहत चाय बागान श्रमिकों के खातों में पांच-पांच हजार रुपये ₹5000 डाले गए, जिसे लेकर श्रमिकों के बीच आशंका है कि यह राशि उनके भविष्य निधि (पीएफ) से समायोजित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा बनाए गए कानूनों में बदलाव कर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। दीमाहासव क्षेत्र में आदिवासियों की लगभग तीन हजार बीघा जमीन सीमेंट फैक्ट्री के लिए दिए जाने का आरोप भी लगाया।