नोएडा हिंसा मामले में अंतरराष्ट्रीय साजिश का दावा, पाक कनेक्शन और ‘अर्बन नक्सल’ एंगल की जांच तेज
Claims of an International Conspiracy in the Noida Violence Case
नोएडा /जमशेदपुर। Claims of an International Conspiracy in the Noida Violence Case, गौतमबुद्ध नगर में 13 अप्रैल को वेतन वृद्धि की आड़ में हुई हिंसा के पीछे एक गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा हुआ है।
इस पूरी हिंसा की कमान एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक पास छात्र आदित्य आनंद और झारखंड के हजारीबाग निवासी रूपेश राय के हाथों में थी।
पुलिस जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस हिंसा को हवा देने के लिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स का सहारा लिया गया। पुलिस अब आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने और उनके बैंक खाते फ्रीज करने की तैयारी में है।
पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि साजिश का मुख्य सूत्रधार आदित्य आनंद है, जो एनआईटी जैसी प्रतिष्ठित संस्थान से बीटेक कर चुका है।
उसके साथ हजारीबाग का रूपेश राय और मनीषा चौधरी शामिल थे। ये तीनों 31 मार्च को नोएडा आए और सेक्टर-14 सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में रेकी की।
इन्होंने मजदूर बिगुल दस्ता के नाम से कर्मियों को लामबंद किया और क्यूआर कोड के जरिए 800-800 सदस्यों के तीन वाट्सएप ग्रुप बनाए।
पाकिस्तान से आपरेट हुए एक्स हैंडल
जांच में पता चला कि जब 11 अप्रैल को पुलिस ने रूपेश और मनीषा को हिरासत में लिया, तब आदित्य आनंद ने साजिश को आगे बढ़ाया।
इसी दौरान दो एक्स हैंडल— 'अनुषी तिवारी प्राउड इंडियन नबी' और 'मीर इलयास आईएनसी'— से पुलिस की कार्रवाई में 20 लोगों की मौत और 99 के घायल होने की झूठी सूचना फैलाई गई।
एक्स की रिपोर्ट के अनुसार, दंगे के वक्त इन दोनों अकाउंट्स के आइपी एड्रेस और वीपीएन पाकिस्तान के मिले हैं। एटीएस की टीम अब इस पाकिस्तानी कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।
भेष बदलकर भागा आदित्य, अब रासुका की तैयारी
एनआईटी के पूर्व छात्र आदित्य आनंद की भूमिका बेहद सक्रिय रही। 10 अप्रैल को उसने सेक्टर-82 में भड़काऊ भाषण दिए। जब पुलिस ने उसके साथियों को पकड़ा, तो आदित्य ने अपनी पहचान छिपाने के लिए बाल कटवा लिए।
अगले दिन फिर प्रदर्शन में शामिल हुआ। वह वर्तमान में फरार है और पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है।
यमुना एक्सप्रेसवे जाम करने की थी साजिश
आरोपियों ने वाट्सएप ग्रुप पर 'नानी याद दिलाने' जैसे वायस मैसेज भेजकर कर्मियों को उकसाया था। उनकी योजना कुलेसरा पुल और यमुना एक्सप्रेसवे को पूरी तरह जाम कर शहर की रफ्तार रोकने की थी।
पुलिस इस मामले में अब तक 62 दंगाइयों को जेल भेज चुकी है और 13 मुकदमे दर्ज किए गए है।
अर्बन नक्सल एंगल से जांच
पुलिस के लिए सबसे बड़ी पहेली रूपेश राय और आदित्य आनंद का प्रोफाइल है। आदित्य जहां इंजीनियर है, वहीं रूपेश खुद को आटो चालक बताता था।
हालांकि, रूपेश के पास से भारी मात्रा में अर्थशास्त्र और जटिल साहित्य की किताबें मिलना और उसकी देशव्यापी ट्रैवल हिस्ट्री ने संदेह पैदा कर दिया है।
पुलिस इसे अर्बन नक्सल माड्यूल से जोड़कर देख रही है। बैंक खातों की जांच से यह साफ होगा कि इस साजिश के लिए फंडिंग कहां से हो रही थी।