आरटीई अधिनियम के तहत फीस प्रतिपूर्ति में लापरवाही, मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश दिए
Chief Secretary issues strict instructions
लखनऊ। प्रदेश में निश्शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति में लापरवाही सामने आई है।
इस पर मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर अभिभावकों को वित्तीय सहायता और निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की धनराशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के तहत गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पढ़ने वाले अलाभित समूह और कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए सरकार की ओर से फीस प्रतिपूर्ति और वित्तीय सहायता दी जानी है। इसके लिए पहले भी बेसिक शिक्षा निदेशक की ओर से दो बार सभी जिलों को निर्देश भेजे गए थे।
इसके बावजूद अधिकांश जिलों में भुगतान की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। समीक्षा में सामने आया है कि केवल गाजियाबाद और बागपत जिलों में ही पूरी तरह भुगतान किया गया है, जबकि कुशीनगर में आंशिक भुगतान हुआ है। अन्य जिलों में न तो अभिभावकों को वित्तीय सहायता दी गई और न ही स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि जारी की गई, जिसे शासन ने बेहद असंतोषजनक माना है।
सभी जिलाधिकारी इस मामले को प्राथमिकता देते हुए एक सप्ताह के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने और इसकी अनुपालन रिपोर्ट शासन को भेजने के लिए कहा गया है। शुक्रवार को इस संबंध में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा, शिक्षा निदेशक (बेसिक), मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक और सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।