ग्रामीण परिवहन को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को मंजूरी
Chief Minister Village Transport Scheme-2026 approved
लखनऊ। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को कैबिनेट से स्वीकृति दे दी है।
इसके तहत प्रदेश की 59,139 ग्राम सभाओं को बस सेवा से जोड़ा जाएगा, जबकि 12,200 गांव ऐसे हैं जहां अभी तक कोई बस सेवा नहीं है। इन गांवों तक परिवहन सुविधा पहुंचाने के लिए परिवहन निगम के साथ-साथ निजी बस संचालकों को भी बसें चलाने की अनुमति दी जाएगी।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों को सीधे ब्लाक, तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ना है, ताकि ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए आवागमन में आसानी हो सके। योजना के तहत निजी बस संचालकों को अनुबंध पर बसें चलाने की अनुमति दी जाएगी और उन्हें परमिट व टैक्स में छूट दी जाएगी।
बस संचालन के लिए आने वाले आवेदनों की जांच और चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। इस समिति में मुख्य विकास अधिकारी, एआरटीओ और परिवहन निगम के अधिकारी शामिल होंगे। चयन प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
बसें गांव से चलकर सुबह अधिकतम 10 बजे तक जिला मुख्यालय पहुंचेंगी और शाम चार से आठ बजे के बीच गांव लौटेंगी। आवश्यकता और मांग के अनुसार बसों की संख्या और फेरे बढ़ाए भी जा सकेंगे। बसों का संचालन मुख्य रूप से उसी क्षेत्र के लोग करेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
योजना के तहत 15 से 28 सीट क्षमता वाले छोटे वाहन (करीब सात मीटर लंबाई) चलाए जाएंगे। इनमें डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन शामिल होंगे, जबकि एनसीआर क्षेत्र में केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन ही संचालित किए जाएंगे।
प्रत्येक ब्लाक में कम से कम दो वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा और हर ग्राम पंचायत तक प्रतिदिन कम से कम दो फेरे लगाए जाएंगे, ताकि ग्रामीणों को नियमित परिवहन सुविधा मिल सके।
अनुबंधित वाहन पंजीकरण की तिथि से अधिकतम आठ वर्ष पुराने ही स्वीकार किए जाएंगे। वाहनों का अनुबंध 10 वर्ष के लिए होगा, जिसे आगे पांच वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकेगा। डीजल वाहनों की अधिकतम आयु 10 वर्ष और सीएनजी व इलेक्ट्रिक वाहनों की आयु 15 वर्ष तय की गई है।
25 हजार से अधिक लोगों को रोजगार
निजी बस संचालकों का चयन आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए 2000 रुपये आवेदन शुल्क और प्रति वाहन 5000 रुपये प्रतिभूति राशि जमा करनी होगी। इसके अलावा निजी वाहन संचालकों को परिवहन निगम को 1500 रुपये प्रतिमाह संरक्षण शुल्क देना होगा।
वाहन संचालक स्थानीय मांग के अनुसार किराया तय कर सकेंगे, लेकिन यह सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक नहीं होगा। दुर्घटना की स्थिति में वाहन स्वामी ही जिम्मेदार होगा।
अनुमान है कि एक बस से करीब सात लोगों को रोजगार मिलेगा। इस प्रकार योजना के लागू होने से ड्राइवर, कंडक्टर, क्लीनर और अन्य सेवाओं सहित करीब 25 हजार लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की संभावना है।