मास्टर प्लान-2031 के प्रस्तावित संशोधनों पर लघु उद्योग भारती ने स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष रखे सुझाव एवं आपत्तियाँ

Laghu Udyog Bharati submitted suggestions

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चंडीगढ़, 26 जून 2026: आज यूटी गेस्ट हाउस में चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के प्रस्तावित संशोधनों के संबंध में आयोजित ओपन हाउस बैठक में लघु उद्योग भारती, चंडीगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष अवी भसीन के नेतृत्व में स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष विस्तृत सुझाव एवं आपत्तियाँ प्रस्तुत कीं। संगठन ने आग्रह किया कि मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) की आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि यही उद्योग चंडीगढ़ की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि वर्ष 2006 में औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित अंतिम प्रमुख नीतिगत बदलावों का सबसे अधिक लाभ दो कनाल से बड़े औद्योगिक प्लॉटों के मालिकों को मिला था, जबकि एक कनाल एवं उससे छोटे प्लॉटों पर संचालित हजारों लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। इसलिए मास्टर प्लान-2031 के प्रस्तावित संशोधनों में छोटे उद्योगों की वर्षों पुरानी आवश्यकताओं एवं मांगों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाना चाहिए।

लघु उद्योग भारती द्वारा प्रस्तुत प्रमुख सुझाव इस प्रकार हैं:

  • * मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को FAR का लाभ: बढ़े हुए FAR का लाभ केवल नए निर्माण तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों को भी दिया जाए। छोटे एवं सूक्ष्म उद्योगों के लिए अपनी फैक्ट्री को तोड़कर दोबारा निर्माण करना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। उन्हें केवल अधिकतम अनुमेय ग्राउंड कवरेज तथा स्टोरेज एवं औद्योगिक कार्यों के लिए दो अतिरिक्त मंजिलों की आवश्यकता है, जिससे किसी अतिरिक्त आधारभूत संरचना (Infrastructure) पर विशेष भार भी नहीं पड़ेगा।
  • * मौजूदा निर्माणों का नियमितीकरण: वर्ष 1982 के बाद औद्योगिक भवन नियमों में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया। समय के साथ बढ़ती औद्योगिक आवश्यकताओं एवं अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए उद्योगों ने अपनी इकाइयों में आवश्यक निर्माण किए हैं। वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयाँ ऐसे ही ढांचों का उपयोग कर रही हैं। इसलिए इन निर्माणों को तोड़ने के बजाय प्रस्तावित संशोधनों के माध्यम से नियमित (Regularise) किया जाना चाहिए।
  • * सेवा गतिविधियों को शामिल किया जाए: औद्योगिक सेवा गतिविधियों (Service Activities) को मास्टर प्लान में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए, क्योंकि ये मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का अभिन्न हिस्सा हैं तथा बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराती हैं।
  • * फैक्ट्री आउटलेट्स की अनुमति: औद्योगिक क्षेत्रों में Factory Outlets स्थापित करने की अनुमति दी जाए, ताकि भारत सरकार के “वोकल फॉर लोकल” एवं “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को बढ़ावा मिले तथा स्थानीय निर्माता अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचा सकें।
  • * औद्योगिक कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं को अनुमति: हार्डवेयर स्टोर, मिल स्टोर, शीट एवं पाइप सप्लायर, फास्टनर डीलर तथा अन्य औद्योगिक कच्चे माल के विक्रेताओं को औद्योगिक क्षेत्रों में कार्य करने की अनुमति दी जाए, क्योंकि ये उद्योगों के लिए आवश्यक सहायक सेवाएँ हैं और इनका संचालन सेक्टरों अथवा एससीओ मार्केट से प्रभावी ढंग से संभव नहीं है।
  • * ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशन: औद्योगिक क्षेत्रों में कार सर्विस स्टेशन, वाहन मरम्मत, सर्विसिंग तथा ऑटोमोबाइल एक्सेसरीज़ की बिक्री एवं फिटमेंट की अनुमति दी जाए, क्योंकि ये गतिविधियाँ औद्योगिक एवं MSME इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

इस अवसर पर लघु उद्योग भारती, चंडीगढ़ के अध्यक्ष अवी भसीन ने कहा कि चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के प्रस्तावित संशोधन जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित होने चाहिए। उनका उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि ऐसा व्यावहारिक एवं उद्योग हितैषी ढांचा तैयार करना होना चाहिए, जो मौजूदा उद्योगों को संरक्षण प्रदान करे, औद्योगिक विकास को गति दे, रोजगार के अवसर बढ़ाए तथा चंडीगढ़ के विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाए।