हरियाणा के सिरसा में बिगड़ा लिंगानुपात, 883 पहुंचा आंकड़ा, सरकार अलर्ट
- By Gaurav --
- Saturday, 09 May, 2026
Alarm Over Falling Sex Ratio
हरियाणा के सिरसा जिले में बेटी बचाओ अभियान को झटका देने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2026 के अप्रैल माह तक के जन्म पंजीकरण आंकड़ों के अनुसार जिले का लिंगानुपात घटकर 883 पर पहुंच गया है। फरवरी और मार्च में यह आंकड़ा 900 के स्तर पर था, लेकिन अप्रैल में इसमें 17 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से अप्रैल 2026 तक जिले में कुल 5548 बच्चों का जन्म पंजीकृत हुआ। इनमें 2947 लड़के और 2601 लड़कियां शामिल हैं। इसी आधार पर जिले का सेक्स रेश्यो एट बर्थ (SRB) 883 दर्ज किया गया है। प्रदेश स्तर पर भी सिरसा का प्रदर्शन चिंताजनक श्रेणी में पहुंच गया है।
लिंगानुपात में गिरावट को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में कहा कि अब विवाह कराने वाले पंडित, मौलवी और ग्रंथी भी नवविवाहित जोड़ों को कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ संकल्प दिलाएंगे।
सरकार ने अवैध लिंग जांच पर रोक लगाने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया है। डॉ. मिश्रा ने एमटीपी किट की अवैध बिक्री रोकने के लिए मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच और बिना अनुमति चल रहे अस्पतालों पर सख्ती के निर्देश दिए हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान 1240 निरीक्षण किए गए, जिनमें नियमों के उल्लंघन पर 58 नोटिस जारी किए गए। अकेले 2025 में 44 केमिस्ट शॉप सील की गईं और 6000 से अधिक एमटीपी किट जब्त की गईं।
हालांकि प्रदेश स्तर पर हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2010 में प्रति 1000 लड़कों पर लड़कियों का अनुपात 838 था, जो 2025 में बढ़कर 923 तक पहुंच गया। सरकार का दावा है कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान शुरू होने के बाद अब तक करीब 60 हजार बेटियों को बचाया जा चुका है।
अब सरकार कम लिंगानुपात वाले जिलों में ‘सहेली नेटवर्क’ और आशा कार्यकर्ताओं के जरिए हाई रिस्क गर्भावस्थाओं की निगरानी और रिवर्स ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत करने की तैयारी में है, ताकि अवैध लिंग चयन के नेटवर्क पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।