अमेठी की सुनीता देवी: एक महिला का संघर्ष से स्वावलंबन तक का सफर
A Woman's Journey from Struggle to Self-Reliance
लखनऊ। A Woman's Journey from Struggle to Self-Reliance, उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद में संग्रामपुर विकासखण्ड के छोटे से गांव उत्तरगांव पुरवा डिहवा की सुनीता देवी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। कभी एक छोटी सी कच्ची कोठरी में पूरे परिवार के साथ गुजर-बसर करने वाली 41 वर्षीय सुनीता के पास न तो खेती थी और न ही आय का कोई स्थायी साधन। पति शहर में सिलाई करते थे, लेकिन महंगाई के दौर में बचत के नाम पर हाथ खाली रहते थे। भविष्य के अंधकार को चीरते हुए सुनीता ने परिस्थितियों के आगे झुकने के बजाय 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' का हाथ थामा और आज वह सफलता के उस मुकाम पर हैं जहाँ पूरा जिला उन्हें सम्मान की नजर से देखता है।
स्वावलंबन की पहली सीढ़ी
सुनीता की तकदीर तब बदली जब वह गांव के 'सहारा महिला स्वयं सहायता समूह' से जुड़ीं। यहाँ से मिले सही मार्गदर्शन और महज 10,000 रुपये के पहले ऋण ने उनके सपनों को पंख दिए। उन्होंने घर पर सिलाई मशीन से कपड़े तैयार कर गांव-गांव फेरी लगाना शुरू किया। बढ़ते आत्मविश्वास के साथ उन्होंने 50,000 रुपये का दूसरा ऋण लिया और अमेठी में किराये पर 'शिवम स्पोर्ट्स' नाम से दुकान खोलकर ट्रैक सूट और टी-शर्ट की सिलाई शुरू की। उनकी मेहनत का ही परिणाम था कि जल्द ही उन्होंने किराये की जगह छोड़कर अपनी खुद की दुकान स्थापित कर ली।
योगी सरकार का सहयोग और 'शिवम स्पोर्ट्स' की नई पहचान
सुनीता के व्यवसाय को असली रफ्तार तब मिली जब अगस्त 2025 में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक से उन्हें 3 लाख रुपये का सीसीएल ऋण प्राप्त हुआ। योगी सरकार की इस वित्तीय मदद से उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार किया। आज अमेठी में 'शिवम स्पोर्ट्स' स्पोर्ट्स वियर के लिए एक जाना-माना नाम बन चुका है। सर्दियों के सीजन में ट्रैक सूट की मांग बढ़ने से उनकी मासिक आय 90,000 रुपये के पार पहुँच गई है। सुनीता अब बैंक की किस्तें समय पर चुका रही हैं और उन्होंने न केवल अपना पक्का घर बनवा लिया है, बल्कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं।
खुद बनीं उद्यमी, 4 अन्य को दिया रोजगार
सुनीता देवी आज केवल एक सफल व्यवसायी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने अपने कारखाने में 4 स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया है, जिसमें उनके पति और बेटा भी हाथ बटाते हैं। उनकी इस उपलब्धि से प्रेरित होकर गांव की अन्य महिलाएं भी अब समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं। सुनीता का अगला लक्ष्य अमेठी में अपनी दूसरी दुकान शुरू करना है, जिसके लिए उन्होंने जमीन भी खरीद ली है। उनकी यह कहानी साबित करती है कि यदि महिला के आत्मविश्वास को सरकार का उचित सहयोग मिले, तो वह किसी भी बाधा को पार कर सकती है।