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प्रोजेक्टों को अंतिम रूप देने में लग जाते हैं कई वर्ष, नहीं ले पाता प्रशासन फैसला-

प्रोजेक्टों को अंतिम रूप देने में लग जाते हैं कई वर्ष, नहीं ले पाता प्रशासन फैसला-

शहर में बिजली की तारों को अंडरग्राउंड करने का प्रोजैक्ट अभी भी कागजों में-

चंडीगढ़। शहर में बिजली की तारों को अंडरग्राउंड करने का प्रोजैक्ट फिलहाल कागजों में ही है। प्रोजैक्ट सैक्टर-8 से शुरू होना है, लेकिन यू.टी. का इलैक्ट्रिसिटी डिपार्टमैंट इसे लागू करने के लिए कंपनी फाइनल नहीं कर सका है। हालांकि डिपार्टमैंट द्वारा कई बार टैंडर भी जारी किए जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार अभी तक इस प्रोजैक्ट के लिए डिपार्टमैंट द्वारा 3 बार टैंडर जारी किए जा चुके हैं लेकिन अभी तक किसी कंपनी को कांट्रैंक्ट नहीं दिया गया। अभी तक इस प्रोजैक्ट के लिए 8 कंपनियों की एप्लिकेशन मिल चुकी हैं लेकिन कोई भी कंपनी टैक्निकल बिड क्लियर करने में सफल नहीं हो पाई।  यही वजह है कि अब डिपार्टमैंट ने चौथी बार टैंडर जारी करने की तैयारी कर ली है। दरअसल डिपार्टमैंट इस प्रोजैक्ट के जरिए डिस्ट्रिब्यूशन लॉस भी कम करना चाहता है। मौजूदा समय में डिपार्टमैंट के करीब 2.17 लाख कंज्यूमर हैं, लेकिन गर्मियों में पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से बार-बार कईं घंटे तक बिजली कट का सामना करना पड़ता है। नया इंफ्रास्ट्रक्चर मिलने से यह दिक्कत नहीं आएगी।  ज्वाइंट इलैक्ट्रिसिटी रैगुलेट्री कमिशन (जे.ई.आर.सी.) ने प्रोजैक्ट के लिए 17.89 करोड़ रुपए का बजट अप्रूव किया है। पायलट प्रोजैक्ट के तहत सबसे पहले सैक्टर-8 से शुरुआत होने है, क्योंकि यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे पुराना है। इस प्रोजैक्ट का फायदा मॉनसून में भी मिलेगा, जबकि तेज हवाओं और भारी बारिश की वजह से डिपार्टमैंट को मजबूरी में पावर सप्लाई रोकनी पड़ती है। भविष्य में कंज्यूमर्स को इस तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।  बिजली का एक और अहम प्रोजैक्ट स्मार्ट ग्रिड भी कंप्लीट नहीं हो पाया है। नैशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन द्वारा यह प्रोजैक्ट 28.58 करोड़ रुपए में तैयार किया जाएगा।  पूरे खर्चे में 70 प्रतिशत शेयर प्रशासन का होगा जबकि 30 प्रतिशत हिस्सेदारी नैशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन को देनी है। इस प्रोजैक्ट का फायदा यह होगा कि इससे बिजली चोरी होने जैसे मामलों में अंकुश लग पाएगा। इसके साथ ही लोड मैनेजमैंट और टी. एंड डी. लॉस जैसी परेशानियां भी दूर हो जाएंगी।

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