हरियाणा का सबसे हरा-भरा जिला बना यमुनानगर, 60 लाख से अधिक पेड़ों के साथ रचा इतिहास
- By Gaurav --
- Thursday, 11 Jun, 2026
Yamunanagar Emerges as Haryana’s
हरियाणा में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में यमुनानगर ने एक नई पहचान बनाई है। हाल ही में जारी डिजिटल गणना के आंकड़ों के अनुसार जिले में 60 लाख से अधिक पेड़ दर्ज किए गए हैं, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। राज्य के कुल पेड़ों में यमुनानगर की हिस्सेदारी 14.86 प्रतिशत बताई गई है, जिसके चलते इसे हरियाणा का सबसे हरा-भरा जिला माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस उपलब्धि के पीछे Kalesar National Park की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा जिले में वर्षों से अपनाए जा रहे एग्रो फॉरेस्ट्री (कृषि वानिकी) मॉडल ने भी हरियाली बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
यमुनानगर के हजारों किसानों ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ पॉपुलर और सफेदा जैसे व्यावसायिक पेड़ों का बड़े पैमाने पर रोपण किया। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। कृषि और वन आधारित इस मॉडल ने जिले को हरियाली और आर्थिक समृद्धि दोनों क्षेत्रों में नई पहचान दिलाई है।
पूर्व पर्यावरण मंत्री Kanwar Pal Gurjar ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान एग्रो फॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाए गए थे। किसानों को पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया और उन्हें इसके आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार और किसानों के संयुक्त प्रयासों का ही परिणाम है कि आज यमुनानगर हरियाली के मामले में पूरे हरियाणा में प्रथम स्थान पर पहुंचा है। उनका कहना था कि उद्देश्य केवल हरित क्षेत्र बढ़ाना नहीं था, बल्कि किसानों और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी था।
कंवरपाल गुर्जर ने बताया कि पॉपुलर औरयमुनानगर की यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे हरियाणा के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य जिलों में भी इसी मॉडल को अपनाया जाए तो हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। सफेदा की खेती ने किसानों को अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत प्रदान किया है, वहीं पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।