पटना में 'जल संसद': "आज नहीं जागे तो अगली पीढ़ी माफ नहीं करेगी"
'Water Parliament' in Patna: "If We Don't Wake Up Today
पटना। अपने सात सरोकारों में एक जल संरक्षण के प्रति सचेत दैनिक जागरण मंगलवार को होटल चाणक्य में जल संसद का आयोजन किया। भूजल संरक्षण के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से दो सत्रों में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि बिहार में अन्य राज्यों की तुलना में जल की उपलब्धता अधिक है, लेकिन भूजल पर अधिक निर्भरता के गंभीर परिणाम कई क्षेत्रों में दिखने लगे हैं। इसका मानव व जीव-जंतु के स्वास्थ्य तथा अन्न, फल-सब्जी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव दिख रहा है।
मुख्य अतिथि बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि अगर हम आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। भारत जैसे देश में जहां नदियों को मां का दर्जा दिया जाता है, वहां जल का सम्मान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। हमें उसी परंपरा को पुनर्जीवित करना होगा।
सुरक्षित भविष्य का निर्माण करने में सहयोग का संकल्प
उन्होंने विशेषकर युवाओं से आग्रह किया, आप बदलाव के सबसे बड़े वाहक हैं। आपकी सोच, आपकी पहल और आपका संकल्प ही देश के जल भविष्य को सुरक्षित कर सकता है। उन्होंने सभी को जल संरक्षण को अपनी आदत बनाने और एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण करने में सहयोग का संकल्प दिलाया।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी), पटना से सेवानिवृत्त प्रो. संतोष कुमार, केंद्रीय भूजल बोर्ड, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष एके अग्रवाल, दैनिक जागरण के मुख्य महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी, डिप्टी एडिटर, बिहार अश्विनी कुमार सिंह व पीएचईडी के मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) रामचंद्र पांडेय ने दीप जलाकर किया।
पहले सत्र में बिहार में भूजल
वर्तमान और भविष्य विषय पर एनआइटी पटना के वरीय प्राध्यापक प्रो. रमाकर झा ने कहा कि उद्योग समय की जरूरत है। लेकिन, कहां कितनी जल की उपलब्धता है। इसे ध्यान में रखकर कर ही भूजल दोहन की अनुमति दी जाए।
प्रो. संतोष कुमार ने कहा कि भूजल के अत्यधिक दोहन से जमीन के अंदर पानी के स्तर के साथ-साथ भूमि की सतह भी नीचे जा रही है। एके अग्रवाल ने कहा भूजल दोहन और रिचार्ज में संतुलन के लिए भूमि के सतह के जल का उपयोग बढ़ाने होगा।
भूजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बढ़ चुका बिहार
वहीं, भूजल प्रबंधन और स्वास्थ्य विषय पर दूसरे सत्र में रामचंद्र पांडेय ने कहा कि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग सतह के जल का उपयोग बढ़ाकर भूजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बढ़ चुका है।
आइजीआइएमएस की डॉ. वर्षा सिंह ने जल जनित बीमारियों और जल संरक्षण को लेकर सक्रिय रहने वाले किशोर जायसवाल ने जल प्रबंधन पर अपने अनुभव साझा किए।
दैनिक जागरण की आरे से भूजल संरक्षण को लेकर राज्यव्यापी अभियान चलाया गया है, जिसमें आमजन नदी, तालाब-पोखर आदि के संरक्षण के लिए बहुत उत्साह से आगे आए। अभियान के फीडबैक भी कार्यक्रम में साझा किया गया।