इस साल बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख आ गई; आज बसंत पंचमी पर घोषणा, गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट इस तिथि को खुलेंगे
Badrinath Dham Kapat Open Date 2026 Announced Kedarnath Date Breaking
Badrinath Dham Kapat Open: अगर आप इस साल उत्तराखंड में चार धाम की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए ये खबर काम की है। इस साल 2026 में उत्तराखंड चार धाम यात्रा में से एक बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने को लेकर तारीख की घोषणा कर दी गई है। आज बसंत पंचमी के अवसर पर परंपरा और विधि के अनुसार कपाट खोले जाने की तिथि घोषित की गई। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को शुभ मुहूर्त पर सुबह 6.15 मिनट पर पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ खोले जायेंगे। जिसके बाद सभी श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर सकेंगे।
मतलब इस बार पिछले साल 2025 के मुक़ाबले 11 दिन पहले भगवान बद्रीनाथ के कपाट खोले जा रहे हैं। वहीं इस साल उत्तरकाशी के गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल 2026 को सभी श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। जबकि बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि परंपरा के अनुसार 15 फरवरी महाशिवरात्रि को घोषित की जाएगी। आपको बता दें कि इस समय बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम और गंगोत्री-यमुनोत्री धाम इलाके में भारी बर्फबारी हो रही है। बर्फ की सफ़ेद चादर छाई हुई है।
25 नवंबर को बंद किए गए थे बद्रीनाथ के कपाट
बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर 2025 को विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ दोपहर 2:56 बजे बंद किए गए थे। कपाट जब बंद किए गए तो उस आखिरी दिन भी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। कपाट बंद होने के दौरान धाम पर गाजे-बाजे भी बजे और पूरा धाम बद्री विशाल की जय-जयकार से गूंज उठा था। इस दौरान मंदिर को 12 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया था। मालूम हो कि पिछले साल 2025 में कपाट खुले रहने के दौरान देशभर के लाखों श्रद्धालुओं ने बद्रीनाथ के दर्शन किए।
पिछले साल 4 मई को खोले गए थे बद्रीनाथ के कपाट
गौरतलब है कि पिछले साल 2025 में बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई की सुबह 6.00 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। जबकि इसके पिछले साल 2024 में बद्रीनाथ धाम के कपाट 12 मई को खोले गए और 17 नवंबर को रात 9:07 बजे बंद किए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह माना जाता है कि वर्ष भर में साल के 6 महीने (ग्रीष्मकालीन) मनुष्य भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, जबकि बाकी के 6 महीने (शीतकालीन) यहां देवता स्वयं भगवान विष्णु की आराधना करते हैं. जिसमें मुख्य पुजारी देवर्षि नारद होते हैं।
बद्रीनाथ धाम है भू वैकुंठ...
बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड के चमोली जनपद में पवित्र अलकनन्दा नदी के दाहिने तट पर स्थित है। यह भगवान श्रीहरि विष्णु का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है, जिसे 'विशालपुरी' भी कहा जाता है। यूं कहते है की बद्रीनाथ धाम का यह पवित्र स्थल भू वैकुंठ है। यानि यहां भगवान विष्णु का साक्षात रूप में निवास है। यहां भगवान बद्रीनाथ की शालिग्राम पत्थर की स्वयम्भू मूर्ति की पूजा होती है। मान्यता अनुसार भगवान विष्णु ने नारायण रूप में सतयुग के समय इसी स्थान पर भगवान शंकर की घोर तपस्या की थी।
इस धाम के बारे में कहावत है कि- "जो जाए बद्री, वो न आए ओदरी" यानि जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है उसे माता के गर्भ में दोबारा नहीं आना पड़ता. प्राणी जन्म और मृत्यु के चक्र से छूट जाता है और मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। बद्रीनाथ धाम पर किया गया कोई भी पुण्य या कोई भी पूजा का फल कभी खाली नहीं जाता है और बाकी स्थानों से उसका दुगना फल मिलता है। इसलिए अगर आपको भी मौका मिले और आप जा पायें तो भगवान बद्री के दर्शन करने जरूर जाइएगा।