BJP से चंडीगढ़ मेयर उम्मीदवार की घोषणा; पार्टी ने सीधा नामांकन के दिन ही पर्दा उठाया, नंबर में भाजपा सबसे आगे, मेयर बनना तय!
BJP Announced Candidate For Chandigarh Mayor Election 2026 Breaking
Chandigarh Mayor Election 2026: 29 जनवरी को होने वाले चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए आखिर बीजेपी ने अपने उम्मीदवार से पर्दा उठा दिया है। रणनीति के तहत सीधा नामांकन के दिन ही उम्मीदवार का ऐलान किया गया है। बीजेपी ने वार्ड नंबर-12 से पार्षद सौरभ जोशी को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। इसी के साथ सौरभ जोशी ने नगर निगम सचिव के समक्ष अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस बार मेयर चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों के बीच मुक़ाबला है। हालांकि इस त्रिकोणीय मुक़ाबले में संख्या बल के लिहाज से बीजेपी सीधे तौर पर सबसे मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
दरअसल बीजेपी की यह मजबूती और उसकी यह ताकत तब और बढ़ गई है, जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन से किनारा करके अकेले-अकेले लड़ने का फैसला लिया है। जहां ऐसे में संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस और आप दोनों ही पार्टियों के पास वोट बहुत कम हैं। कांग्रेस-आप गठबंधन जहां बीजेपी को कांटे की टक्कर दे सकता था, गठबंधन न होना अब बीजेपी के लिए यह सीधा फायदा है। मसलन चंडीगढ़ में एक बार फिर बीजेपी का मेयर बनने जा रहा है और यह लगभग तय है। वहीं बीजेपी का भी दावा है कि मेयर पद पर उसका कब्जा बरकरार रहेगा।
अभी किस पार्टी के पास कितने पार्षद?
गौरतलब है कि हाल ही में आम आदमी पार्टी से 2 महिला पार्षदों के बीजेपी में आने से बीजेपी के पार्षदों की संख्या अभी 18 है। पहले पार्टी के पास पार्षदों की संख्या 16 थी। मसलन बीजेपी ने अपनी जीत सुनिक्षित करने की तैयारी बहुत पहले से ही शुरू कर दी थी। वहीं आम आदमी पार्टी से 2 पार्षदों के टूटने के बाद इस समय AAP के पास पार्षदों की संख्या 11 रह गई है। जो कि पहले 13 थी। इसके अलावा कांग्रेस के पास कुल पार्षदों की संख्या इस समय 6 है। साथ ही कांग्रेस के पास एक वोट चंडीगढ़ के वर्तमान सांसद मनीष तिवारी का भी है।
इस बार ओपन वोटिंग होगी
चंडीगढ़ नगर निगम में इस बार मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव गुप्त मतदान (सीक्रेट बैलेट से) नहीं, बल्कि हाथ उठाकर (शो ऑफ हैंड्स) किया जाएगा। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पिछले दिनों ही इस संबंध में मंजूरी दी थी। दरअसल, चंडीगढ़ मेयर चुनाव के दौरान पार्षदों की वोटिंग में क्रॉस वोटिंग के अंदेशे और बैलेट पेपर में गड़बड़ी की आशंका के चलते आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेता हाथ ओपन वोटिंग की मांग कर रहे थे। चंडीगढ़ मेयर चुनाव के दौरान अक्सर क्रॉस वोटिंग देखने को मिलती आई है। जिससे किसी पार्टी के लिए बाजी किसी भी वक्त पलट जाती है.
चंडीगढ़ मेयर चुनाव के बारे में
मालूम रहे कि, चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है। इस चुनाव में जनता वोट नहीं करती है। जनता द्वारा चुने हुए पार्षद इस चुनाव में वोट डालते हैं। मेयर चुनाव में मौजूदा सांसद का वोट भी पड़ता है। मौजूदा समय में मेयर चुनाव के लिए सांसद के एक वोट के अलावा कुल 35 पार्षदों के वोट हैं। इस समय बीजेपी के पास अपना सांसद नहीं है। जबकि कांग्रेस के पास सांसद के वोट की ताकत है। इससे पहले जब किरण खेर चंडीगढ़ की सांसद थीं तो वह बीजेपी के लिए वोट करती थीं।
पिछले चुनाव में BJP ने मेयर बनाया
चंडीगढ़ में पिछला मेयर चुनाव 30 जनवरी को हुआ था। जिसमें कम नंबर होने के बावजूद बीजेपी अपना मेयर बनाने में कामयाब रही थी और हरप्रीत कौर बबला मेयर बनी थीं। दरअसल क्रॉस वोटिंग से बीजेपी को जीत मिली थी। हालांकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का पद बीजेपी के पास नहीं आया था। AAP गठबंधन के साथ इन दोनों पद पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस से जसबीर सिंह बंटी सीनियर डिप्टी मेयर और तरुणा मेहता डिप्टी मेयर बनी थीं।