चंडीगढ़ ड्रग केस: छह साल बाद आरोपी बरी

Chandigarh Drug Case

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चंडीगढ़: Chandigarh Drug Case: एक अहम फैसले में चंडीगढ़ की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरजीत कौर की अदालत ने इंजेक्शनों से जुड़े एक व्यावसायिक ड्रग मामले में निशा को सभी आरोपों से बरी कर दिया। आरोपी 23 सितंबर 2019 की घटना के संबंध में एनडीपीएस एक्ट की धारा 22 के तहत मुकदमे का सामना कर रही थी।
अभियोजन के अनुसार, 23 सितंबर 2019 को आरोपी के पास से बिना किसी वैध परमिट या लाइसेंस के 13 बुप्रेनोर्फिन इंजेक्शन (2 एमएल प्रत्येक) और 4 फेनिरामाइन इंजेक्शन (10 एमएल प्रत्येक) बरामद किए गए थे। इस कथित बरामदगी के आधार पर एफआईआर नंबर 159 दिनांक 23.09.2019, थाना मलोया, चंडीगढ़ में एनडीपीएस एक्ट की धारा 22 के तहत दर्ज की गई थी।

बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी पर उठाए सवाल

आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता दीक्षित अरोड़ा ने अभियोजन पक्ष की कहानी को कड़े शब्दों में चुनौती दी। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि अभियोजन के प्रमुख गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते और जिरह के दौरान टिक नहीं पाए।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि अभियोजन सबूतों की श्रृंखला (चेन ऑफ एविडेंस) को पूरा करने में विफल रहा और यह साबित नहीं कर सका कि कथित बरामदगी आरोपी के सचेत कब्जे (कॉन्शस पज़ेशन) से हुई थी।

अदालत: अभियोजन आरोप सिद्ध करने में असफल

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसके चलते अदालत ने निशा को एनडीपीएस एक्ट के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया।
इस फैसले के साथ ही छह वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई का अंत हो गया।