डिजिटल महाशक्ति की ओर उत्तर प्रदेश: 2030 तक 5 गीगावाट डेटा क्षमता के साथ बनेगा वैश्विक 'डेटा पावरहाउस'
Uttar Pradesh on its way to becoming a digital superpower
लखनऊ। Uttar Pradesh on its way to becoming a digital superpower, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब 'कन्वेंशनल इकॉनामी' से आगे बढ़कर 'डेटा इकॉनामी' का नया पावरहाउस बनने जा रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में 5 गीगावाट (GW) क्षमता वाले 4 से 5 विशाल डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। फरवरी 2026 के बजट सत्र में 'स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी' के गठन की घोषणा इस क्षेत्र में निवेश और पारदर्शिता को नई गति प्रदान करेगी।
निवेश और संस्थागत ढांचा
उत्तर प्रदेश में डेटा सेंटर उद्योग को संस्थागत रूप देने के लिए सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है।
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निवेश का पैमाना: लगभग ₹30,000 करोड़ के निवेश से 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 900 मेगावाट होगी।
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लेटर ऑफ कम्फर्ट: सरकार अब तक 6 डेटा सेंटर पार्क और 2 इकाइयों सहित कुल 8 परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है।
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सुनिश्चित निवेश: वर्तमान में ₹21,342 करोड़ का निवेश और 644 मेगावाट की क्षमता धरातल पर उतरने के लिए तैयार है।
2017 के बाद का डिजिटल कायाकल्प
आईटी विशेषज्ञों के अनुसार, 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में एक भी डेटा सेंटर स्थापित नहीं था। योगी सरकार की डेटा सेंटर नीति ने इस परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
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डिमांड और सप्लाई: क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग और 'डेटा लोकलाइजेशन' की राष्ट्रीय नीति के कारण बड़ी टेक कंपनियां यूपी को अपनी पहली पसंद बना रही हैं।
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रोजगार के अवसर: डेटा सेंटर के विस्तार से न केवल डिजिटल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि आईटी, नेटवर्किंग और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में हजारों उच्च-तकनीकी रोजगार सृजित होंगे।
भविष्य की संभावनाएं: ई-गवर्नेंस और स्टार्टअप्स
डेटा सेंटर्स का यह क्लस्टर प्रदेश के डिजिटल इकोसिस्टम के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होगा।
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ई-गवर्नेंस: सरकारी सेवाओं की गति और डेटा सुरक्षा में अभूतपूर्व सुधार होगा।
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टेक स्टार्टअप्स: स्थानीय स्टार्टअप्स को सस्ता और सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज उपलब्ध होगा, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
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एआई और बिग डेटा: 5 गीगावाट की विशाल क्षमता उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर देगी।
स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी के गठन और नीति आधारित प्रोत्साहनों से उत्तर प्रदेश अब न केवल सड़कों और एक्सप्रेसवे का प्रदेश है, बल्कि यह देश के 'डिजिटल हाईवे' का भी सबसे महत्वपूर्ण जंक्शन बन गया है।