यूपी की नजर, पांच राज्यों का 'इम्तिहान': बंगाल और असम के परिणाम तय करेंगे 2027 की चुनावी चाल
UP eyes five states for 'test': Bengal and Assam results
लखनऊ। चुनावी लू कहीं भी चल रही हो, उत्तर प्रदेश में उसका ताप अवश्य महसूस किया जाता है। भौगोलिक एवं भाषाई धरातल अलग होने के बावजूद बंगाल, तमिलनाडु, असम, पुडुचेरी एवं केरल के विधान सभा चुनाव परिणामों का पारा चढ़ने से यूपी की राजनीति में होमवर्क बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे यूपी-2027 का सेमीफाइनल बता रहे हैं।
बंगाल और असम में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया तो पार्टी यूपी में चुनावी रथ की गति बढ़ा देगी। लेकिन अगर ममता बनर्जी का जादू फिर चला तो भाजपा नए सिरे से होमवर्क खड़ा करेगी। क्षेत्रीय दलों का मनोबल बढ़ने से बड़े दलों पर राजनीतिक दबाव बनेगा। कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव कर सकती है। वहीं, सपा चुनावी नतीजों के बीच नया नैरेटिव गढ़ने का प्रयास करेगी।
भाजपा का मुख्य फोकस
भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस बंगाल में विजय पताका फहराने पर है। पार्टी ने 2021 के चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस की कड़ी घेरेबंदी की, लेकिन जनता ममता के साथ खड़ी नजर आई। लेेकिन इस बार भाजपा ने नई रणनीति और बदले नैरेटिव के साथ देशभर से बड़ी संख्या में रणनीतिकारों को बंगाल में उतारा। उत्तर प्रदेश के 50 से ज्यादा नेताओं ने बंगाल में महीनों कैंप किया।
28 अप्रैल को वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रोड शो भी बंगाल के चुनावों तक असर डालने वाला एक प्रयोग कहा जा रहा, क्योंकि काशी में बड़ी संख्या में बंगाली बसे हुए हैं। भाजपा ने हार्डकोर हिंदुत्व की धार तेज रखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बंगाल की कई चुनावी सभाओं में उतारा। जिन क्षेत्रों में योगी की सभाएं हुई हैं, वहां के परिणामों पर चुनावी पंडितों की नजर टिक गई है।
चुनावी चाल देखते हुए पार्टी भविष्य में पत्ते फेंकेगी
असम का परिणाम भाजपा की चुनावी सेहत पर असर डालेगा। यहां भी यूपी के नेताओं को भाजपा ने चुनावी रणनीतिकार के रूप में भेजा। तमिलनाडु एवं केरल भाजपा के लिए फिलहाल राजनीतिक प्रयोगशाला है, जहां की चुनावी चाल देखते हुए पार्टी भविष्य में पत्ते फेंकेगी। समाजवादी पार्टी की नजर विशेष रूप से बंगाल चुनाव परिणामों पर है।
पार्टी यह देखेगी कि कौन सा फैक्टर भाजपा को कहां और कितना रोकने में कामयाब हुआ। अखिलेश यादव बंगाल के चुनाव से कोई नैरेटिव गढ़कर यूपी में भाजपा को घेर सकते हैं। उधर, यूपी में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में हांफती कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की संभावनाएं खंगाल रही है।