ट्रंप सरकार का H-1B वीजा फ्रॉड पर शिकंजा, बड़ी टेक कंपनी कॉग्निजेंट का भी नाम

ट्रंप सरकार का H-1B वीजा फ्रॉड पर शिकंजा, बड़ी टेक कंपनी कॉग्निजेंट का भी नाम

US H1B Visa Fraud Investigation

US H1B Visa Fraud Investigation

वॉशिंगटन: US H1B Visa Fraud Investigation: अमेरिका ने बुधवार को कई कंपनियों द्वारा एच-1बी वीजा और पीईआरएम वर्क वीजा में कथित धोखाधड़ी की जांच शुरू की. एक फेडरल लेबर अधिकारी ने बताया कि जांच के दायरे में आने वाली कंपनियों में भारतीय आईटी कंपनी कॉग्निज़ेंट भी शामिल है.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि श्रम विभाग के तहत महानिरीक्षक (ओआईजी) के कार्यालय ने व्यापक योजनाओं का खुलासा किया है. इसमें नियोक्ताओं और श्रमिक दलालों ने फर्जी आवेदन प्रस्तुत किए. जबरन वेतन-रिश्वत व्यवस्था के माध्यम से विदेशी श्रमिकों का शोषण किया और कम वेतन वाले वर्करों के साथ बाजार में बाढ़ लाकर अमेरिकी वर्करों को कम कर दिया.

लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो ने बुधवार को फॉक्स बिजनेस को बताया, 'हमने पहले ही दर्जनों सम्मन जारी करना शुरू कर दिया है. हम यह पक्का करेंगे कि हर सुराग का पता लगाया जाए. हमारे पास कॉग्निज़ेंट जैसी बड़ी कंपनियों के बारे में व्हिसलब्लोअर से जानकारी मिली है, जिनके पीईआरएम और एच-1बी वीजा से जुड़े मुद्दों की चर्चा होती रही है.'

यह कार्रवाई उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की अगुवाई वाली 'धोखाधड़ी खत्म करने वाली टास्क फोर्स' के तहत की गई. बयान में कहा गया, 'इस तरह की गड़बड़ियां लेबर डिपार्टमेंट के उन प्रोग्राम्स की विश्वसनीयता को कम करती हैं जिन्हें असल में मजदूरों की कमी को पूरा करने के लिए बनाया गया था न कि अमेरिकी नौकरियों का नुकसान करके गलत लोगों की जेबें भरने के लिए.'

बयान में कहा गया है कि यह जांच ओआईजी की उस अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके तहत वह मानव तस्करी और जबरन मजदूरी कराने वाले उन नेटवर्क को खत्म करना चाहती है जो विदेशी गेस्ट वर्कर वीजा सिस्टम का गलत फायदा उठाते हैं. इसमें कहा गया है कि ओआईजी उन सभी योजनाओं को जड़ से खत्म करने के लिए दृढ़ है जो कमजोर मजदूरों का शोषण करती है और अमेरिकी मजदूरों से नौकरियां छीनती हैं.