soory-shani-mangal triangle yog on Mahashivratri,

Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर सूर्य-शनि-मंगल का त्रिकोण योग, देंखे किन राशियों पर बरसेगी भोलेनाथ की कृपा

Shiv300

soory-shani-mangal triangle yog on Mahashivratri,

soory-shani-mangal triangle yog on Mahashivratri फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि उपरांत चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का संयोग बन रहा है। 18 फरवरी 2023 को शनिवार के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र उपरांत श्रवण नक्षत्र व्यतिपात योग उपरांत वरयान योग गर करण उपरांत शकुनी व नाग करण तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में इस बार शिवरात्रि का महापर्व रहेगा।

विशेष यह है कि महाशिवरात्रि सूर्य, शनि, मंगल के केंद्र त्रिकोण योग में मनाई जाएगी। महारात्रि पर इस प्रकार का संयोग तीन शताब्दी में एक या दो बार बनता है। इसलिए इस दिन की गई शिव आराधना भक्तों को मनोवांछित फल देने वाली मानी गई है।

ज्योतिषा के अनुसार पंचांग की गणना के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर महाशिवरात्रि का महाव्रत आता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार देखें तो वर्ष पर्यंत आने वाली 12 शिव रात्रि में से 11 शिवरात्रि सामान्य तथा 12वीं महाशिवरात्रि मानी जाती है। क्योंकि एक मास में शिव की रात्रि का आना पौराणिक तथा शास्त्रीय दृष्टिकोण से भी अलग महत्व रखता है।

कुंभ राशि में सूर्य-शनि की युति
धर्म शास्त्रीय व पौराणिक मान्यता के अनुसार देखें तो भगवान शिव की उपासना करने का यह फाल्गुन मास विशिष्ट रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है। सूर्य शनि मंगल का केंद्र त्रिकोण योगग्रह गोचर की गणना के अनुसार देखें तो महा शिवरात्रि महापर्व काल पर कुंभ राशि में सूर्य शनि की युति रहेगी। वहीं वृषभ राशि के मंगल का गोचर रहेगा। ज्योतिष शास्त्र की गणना से देखें तो स्थिर लग्न (सिंह) में सूर्य शनि की कुंभ राशि में युति रहेगी।

इस योग में पूजन फलदायक
वहीं, दशम स्थान पर मंगल का केंद्र त्रिकोण योग बनेगा। नक्षत्र वार तिथि योग आदि की गणना से इस प्रकार के केंद्र त्रिकोण योग तथा गोचर में गुरु शुक्र का मीन राशि पर अवस्थित होना यह बड़े दुर्लभ संयोग होते हैं। अर्थात इस योग में की गई पूजन विशिष्ट मनोरथ को पूरा करती है।

10 को हस्त नक्षत्र में महाकालेश्वर नवरात्र होंगे आरंभ
शास्त्रीय गणना एवं पौराणिक मान्यता दोनों का अपना संयुक्त उपक्रम धर्म तथा अध्यात्मिक की सिद्धि को देने वाला बताया गया है। 10 फरवरी को हस्त नक्षत्र में महाकालेश्वर नवरात्र का आरंभ होगा जो क्रमश: कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु एवं मकर राशि के चंद्रमा से गोचर करता हुआ साथ ही हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा एवं श्रवण नक्षत्र के ऊपर अपना अनुक्रम स्थापित करेगा। ऐसे में नौ दिन नौ नक्षत्र व योगों का होना शिवनवरात्र को विशेष बना रहा है।

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