राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कानून प्रवर्तन अधिकारियों का प्रशिक्षण चंडीगढ़ में सम्पन्न
National Tobacco Control Programme
कानून प्रवर्तन अधिकारियों से तंबाकू नियंत्रण प्रावधानों को पूर्णतः लागू करने का आह्वान
National Tobacco Control Programme: राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP) के तहत कानून प्रवर्तन अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 से 25 मार्च 2026 तक चंडीगढ़ में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ द्वारा पुलिस विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ के सहयोग से पुलिस लाइन, सेक्टर-26, चंडीगढ़ में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में चंडीगढ़ पुलिस के सब-इंस्पेक्टर एवं इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को तकनीकी सहयोग Vital Strategies तथा एनजीओ Generation Saviour Association द्वारा समर्थन प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, यू.टी. चंडीगढ़ की निदेशक डॉ. सुमन सिंह ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा तथा तंबाकू से संबंधित रोगों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए तंबाकू नियंत्रण कानूनों के कड़े एवं निरंतर प्रवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तंबाकू संबंधी उल्लंघनों को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सतत प्रवर्तन और जागरूकता ही तंबाकू उपयोग में कमी लाने की कुंजी है।
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महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए Vital Strategies (दक्षिण-पूर्व एशिया) के निदेशक डॉ. राणा जे. सिंह ने बताया कि ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (GATS-2) के अनुसार चंडीगढ़ में तंबाकू उपयोग की दर लगभग 13.7% है, जो राष्ट्रीय औसत 28.6% से काफी कम है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया कि बिना धुएं वाले तंबाकू का उपयोग बढ़ रहा है तथा कम उम्र में तंबाकू सेवन की शुरुआत चिंता का विषय बनी हुई है।

Generation Saviour Association की निदेशक सुश्री ओपिंदर प्रीत कौर ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान, शैक्षणिक संस्थानों के निकट तंबाकू उत्पादों की बिक्री तथा नाबालिगों को तंबाकू की उपलब्धता जैसे उल्लंघन शहरी क्षेत्रों में प्रमुख चुनौतियां बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग की नियमित जांच और दंडात्मक कार्रवाई के माध्यम से इन कानूनों के पालन में महत्वपूर्ण भूमिका है।
SIPHER के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि तंबाकू सेवन विश्वभर में रोके जा सकने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। उन्होंने ई-सिगरेट एवं वेप जैसे नए निकोटिन उत्पादों से उत्पन्न चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जिनके लिए सख्त निगरानी और प्रवर्तन आवश्यक है।

हिमाचल प्रदेश के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. गोपाल चौहान ने सक्रिय प्रवर्तन दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 तथा इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के सख्त क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि विशेषकर युवाओं में इसकी पहुंच को रोका जा सके। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर प्रभावी प्रवर्तन के व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए।
तीन बैचों में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने और जन-जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों की व्यावहारिक दक्षता बढ़ाने के लिए इंटरैक्टिव रोल-प्ले सत्र भी आयोजित किए गए।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में चंडीगढ़ पुलिस के 150 से अधिक सब-इंस्पेक्टर एवं इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने “नो टोबैको” शपथ भी ली और तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन के साथ-साथ अन्य लोगों को भी तंबाकू मुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।
उल्लेखनीय है कि सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 की विभिन्न धाराओं, विशेषकर धारा 4 (सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध), के प्रवर्तन को चंडीगढ़ में मासिक अपराध समीक्षा का नियमित हिस्सा बनाया गया है।