मातृभूमि, जन अधिकार की रक्षा से बडा कोई धर्म नहींः कमलेश ढांडा
मातृभूमि

मातृभूमि, जन अधिकार की रक्षा से बडा कोई धर्म नहींः कमलेश ढांडा

मातृभूमि, जन अधिकार की रक्षा से बडा कोई धर्म नहींः कमलेश ढांडा

: मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ संकीर्तन हाल, प्रदर्शनी स्थल, लंगर, मीडिया सेंटर का किया अवलोकन
: पानीपत राज्य स्तरीय गुरू तेगबहादुर जयंती अवसर पर पत्रकारों से हुई रूबरू

पानीपत। महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि श्री गुरू तेग बहादुर जी ने मातृभूमि, जन अधिकार की रक्षा के लिए न केवल अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, बल्कि देश व समाज के सामने एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश किया। उनका शौर्य, उनकी गौरवगाथा, उनका समाज के प्रति निभाया गया फर्ज आज की युवा पीढी के लिए सबसे बडी प्रेरणा है और हम सभी का यह दायित्व है कि हम उनकी विचारधारा को गंभीरता के साथ आगे बढाएं।

मातृभूमि, जन अधिकार की रक्षा से बडा कोई धर्म नहींः कमलेश ढांडा

वे रविवार को पानीपत के सेक्टर 13-17 मैदान में श्री गुरू तेग बहादुर जी की 400वें प्रकाश पर्व पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शिरकत कर रही थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ संकीर्तन हाल, प्रदर्शनी स्थल, लंगर, मीडिया सेटर का अवलोकन उपरांत पत्रकारों से रूबरू हुई राज्यमंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि पानीपत की ऐतिहासिक धरती आज गुरू तेग बहादुर जी के विचार पर युवाओं को आगे बढाने का शानदार मंच साबित हो रहा है। उन्होंने संसार में भाईचारा बढाने के लिए हमेशा तत्पर रहे, हिंद की चादर, धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले गुरूवर श्री तेग बहादुर जी के 400 साला प्रकाश पर्व की प्रदेशवासियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा महापुरूषों के विचार को जन-जन तक पहुंचाने की परंपरा के तहत यह शानदार आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि पानीपत के इस मैदान में आज हम महसूस कर सकते हैं कि गुरू तेग बहादुर जी का शौर्य, उनकी गौरवगाथा और उनका समाज के प्रति निभाया गया फर्ज कण-कण में समाया हुआ है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत हमारे इतिहास में एक विशेष स्थान रखती है। वो एक महान विचारक, योद्धा, पथिक व आध्यात्मिक व्यक्तित्व के धनी थे, जिन्होंने धर्म, मातृभूमि और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सब कुछ बलिदान किया। इसलिए उन्हें हिंद की चादर कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सहनशीलता, कोमलता और सौम्यता की मिसाल के साथ साथ गुरू तेग बहादुर जी ने हमेशा यही संदेश दिया कि किसी भी इंसान को न तो डराना चाहिए और न ही डरना चाहिए। धर्म की खातिर उनका बलिदान संत परमेश्वर द्वारा निभाया गया कर्तव्य है। संसार को ऐसे बलिदानियों से प्रेरणा मिलती है, जिन्होंने जान तो दे दी, परंतु सत्य का त्याग नहीं किया। उन्होंने कहा कि अपनी आस्था के लिए बलिदान देने वालों के उदाहरणों से तो इतिहास भरा हुआ है, परंतु किसी दूसरे की आस्था की रक्षा के लिए बलिदान देने की एक मात्र मिसाल है-नवम पातशाह की शहादत। 

राज्यमंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि आज श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाओं पर चलने की आवश्यकता है। यही नहीं जब प्रदेश का प्रत्येक अभिभावक अपने बच्चे को श्री गुरु तेग बहादुर जी के राष्ट्र की एकता, अखण्डता और संस्कृति की रक्षा करने के संकल्प पर चलने के लिए प्रेरित करेगा, तभी देश, प्रदेश का सांस्कृतिक, धार्मिक एवं राष्ट्रीयता की भावना का विकास होगा।