टी.बी वाला डॉक्टर ! !  डॉ. सौरभ फुटेला..

टी.बी वाला डॉक्टर ! !  डॉ. सौरभ फुटेला..

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The TB doctor! Dr. Saurabh Futala.

 पल्मोनरी मेडिसिन में फेफड़ों और श्वसन संबंधी रोगों का भी इलाज : डॉ. सौरभ फुटेला 

सिविल अस्पताल में स्थित टी.बी अस्पताल में लोगों की आमद फिर से बढ़ गई है, जिसका मुख्य कारण छाती विशेषज्ञ और टीबी अस्पताल के प्रभारी डॉ.  सौरभ फुटेला का फिर से सिविल अस्पताल में अपनी सेवाएं जारी करना है। उल्लेखनीय है कि डॉ. सौरभ फुटेला पिछले कई वर्षों से सिविल अस्पताल अबोहर में अपनी सेवाएं दे रहे थे, लेकिन नवंबर 2025 में, वह अतिरिक्त अनुभव प्राप्त करने के लिए एम्स अस्पताल बठिंडा चले गए थे। इस बारे में जानकारी देते हुए डॉ. सौरभ फुटेला ने कहा कि पल्मोनरी मेडिसिन का क्षेत्र बहुत व्यापक है जिसमें अपने व्यावहारिक (प्रेक्टिकल) ज्ञान को अपडेट रखना बहुत जरूरी है और अपने अनुभव को बढ़ाने के लिए वह कुछ समय के लिए एम्स बठिंडा गए थे ताकि यह अनुभव उनके अपने शहर अबोहर के लोगों के काम आ सके।

लोग उन्हें तपेदिक का डॉक्टर कहते हैं ! !
अस्पताल में आने वाले लोग उन्हें टी.बी का डॉक्टर कहते हैं। पल्मोनरी मेडिसिन फेफड़ों और श्वसन नली (सांस) की बीमारियों से संबंधित है। पल्मोनरी मेडिसिन के क्षेत्र के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसे चेस्ट मेडिसिन या रेस्पिरेटरी मेडिसिन भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि टीबी के अलावा, अन्य फेफड़ों के संक्रमण जैसे निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में मवाद, अस्थमा, सीओपीडी, धूल से एलर्जी, फेफड़ों में जलभराव, फेफड़ों का संकीर्ण होना या विस्तार, छाती में मवाद बनना, फेफड़ों में जाल का निर्माण, शरीर में सिस्ट का निर्माण, फेफड़ों का सख्त होना, फेफड़ों का कैंसर, फेफड़ों की नसों में उच्च रक्तचाप, नींद में गड़बड़ी, खर्राटे लेना, सांस लेने में ऑक्सीजन की कमी, फेफड़ों की स्कैनिंग आदि सभी शामिल हैं। टी.बी एक खतरनाक संक्रामक रोग है इसलिए लोगों को छाती के अन्य रोगों के बारे में जानकारी कम होती है। 

टीबी रोगियों के लिए सिविल अस्पताल में कौन सी सेवाएं उपलब्ध हैं?
उन्होंने कहा कि सिविल अस्पताल में टीबी रोगियों के लिए ओ.पी.डी और इनडोर दोनों की सुविधा उपलब्ध है। वह सुबह और शाम दोनों समय इनडोर में भर्ती मरीजों की जांच करते हैं। टी.बी के अलावा फेफड़ों में फंगस, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी, फेफड़ों में जलभराव, फेफड़ों के फटने से संबंधित मरीज भी उनके पास आते हैं। उन्होंने बताया कि सितंबर, अक्टूबर और नवंबर 2025 के दौरान, उनकी ओपीडी में प्रति माह लगभग 1050 मरीज थे और प्रति माह 40 मरीज इनडोर मरीज थे। पिछले दो महीनों के दौरान अर्थात मार्च और अप्रैल 2026 में लगभग 1000 रोगियों को इनडोर आउटडोर की सुविधा दी गई है। और अब जब लोगों को उनके वापस आने का पता चल गया है तो ओ.पी.डी मई महीने में 1410 और इनडोर मरीजों की संख्या 47 तक पहुंच गई है।  

टीबी के बढ़ रहे मरीजों का क्या कारण है?
यह रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है। यह बीमारी मुख्य रूप से हवा के माध्यम से फैलती है। जब टीबी से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता है, छींकता है, बोलता है या गाता है, तो बैक्टीरिया हवा में छोड़ दिए जाते हैं। लंबे समय तक टी.बी रोगी के साथ एक ही कमरे में रहने या निकटता में रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बंद और भीड़भाड़ वाले स्थानों, कम हवादार कमरों, भीड़भाड़ वाली जगहों, जेलों या शरणार्थी शिविरों में टीबी तेजी से फैलती है। उन्होंने कहा कि दवा प्रतिरोधी टीबी (एम. डी. आर.-टी. बी.) रोगियों की संख्या बढ़ रही है। यदि रोगी अपने उपचार को अधूरा छोड़ देता है या गलत दवाएं लेता है, तो बैक्टीरिया दवाओं के लिए प्रतिरोधी हो जाते हैं, जिससे टी.बी का उपचार मुश्किल होता है और यह फैलता रहता है। उपचार के दौरान और बाद में लापरवाही के कारण यह बहुत तेजी से फैलता है। 

100 दिनों का टीबी मुक्त भारत अभियान कितना प्रभावी है?
टीबी मुक्त अभियान के बारे में जानकारी देते हुए डा. फुटेला ने कहा कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत भारत सरकार ने 2030 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, इसे सफल बनाने के लिए 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग, पंजाब ने जिला फाजिल्का को ऐ.आई तकनीक वाली तीन हैंड हेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें प्रदान की हैं। सिविल सर्जन डॉ. कविता सिंह के निर्देशन में और जिला टीबी अधिकारी डॉ. नीलू चुघ के नेतृत्व में फाजिल्का जिले के विभिन्न उच्च जोखिम वाली जगहों पर स्क्रीनिंग और जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि टीबी रोगियों का समय पर निदान किया जा सके और पंजाब को टीबी मुक्त राज्य बनाया जा सके। अबोहर और आसपास के क्षेत्र में लग रहे इन कैंपस का नेतृत्व कर रहे डा. सौरभ फुटेला ने कहा कि इस अभियान के दौरान 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, मधुमेह के रोगी, किसी भी प्रकार के नशे के आदी, टीबी की दवाई खा चुके रोगियों, टीबी की दवा लेने वाले रोगी के पारिवारिक सदस्यों या कोई अन्य व्यक्ति जिसे दो सप्ताह की खांसी, बुखार, बलगम में खून, वजन कम होना आदि की जांच की जा रही है।

यदि टी.बी रोगी के पारिवारिक सदस्यों का परीक्षण होने पर टी.बी की पुष्टि नहीं होती परन्तु संक्रमण पाया जाता है तो उसे टी.बी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (T.P.T.) के तहत 12 सप्ताह तक दवा दी जाती है। इस दवा को सप्ताह में केवल एक दिन ही लेना पड़ता है। टीबी इलाजयोग है और इसका इलाज सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त उपलब्ध है। इसके साथ ही मास मीडिया विंग और फील्ड स्वास्थ्यकर्मी लोगों को तपेदिक के लक्षणों, रोकथाम और उपचार के बारे में जागरूक कर रहे हैं। इस मौके पर मास मीडिया विंग से विनोद खुराना, मनबीर सिंह, दिवेश कुमार, टी.बी. ब्रांच से विपन सुथार, राज सिंह, बलजिंदर कुमार और हरपाल सिंह मौजूद थे।