आम किलो 15,रु उचित दाम मिलना चाहिए : करुणाकर रेड्डी

Mangoes are at ₹15 per kg; a fair price must be ensured

Mangoes are at ₹15 per kg; a fair price must be ensured

** पी,डी,पी,एस के तहत चंद्रबाबू ने जो Rs. 4रु का सपोर्ट प्राइस बताया है, वह बिल्कुल भी उचित नहीं और अन्याय है कहा है- 
**   अगर सरकार किसानों को न्याय नहीं करती तो वाईएसआर पार्टी आम किसानों के समर्थन में लड़ेगी जो विधि विधान से सरकार को पूर्व सूचित किया जा रहा है कहा राज्य विपक्ष पार्टी प्रतिनिधि भुमना करुणाकर रेड्डी ने चेतावनी देते हुए  अपने कैंप कार्यालय के बाहर मीडिया से बात करते हुए अपना एक वीडियो भी जारी किया ।
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( अर्थ प्रकाश / बोम्मा रेडड्डी )

तिरुपति : : (आंध्र प्रदेश) आंध्र राज्य में तोतापुरी आम के लिए कम से कम Rs. 15 प्रति किलो का उचित दाम किसानों को मिलना चाहिये । सरकार किसानों की मदद करना चाहिए लेकिन उनके साथ घोर अन्याय कर रही है कहा राज्य प्रतिनिधि भुमना करुणाकर रेड्डी  (पूर्व विधायक व तिरुमला तिरुपति देवस्थानम प्रधान)।           उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार यह कहकर हाथ मल रही है कि वह PDPS (प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम) के तहत Rs. 4 प्रति kg देगी, लेकिन दूसरी तरफ, आम किसानों से Rs. 6 प्रति kg पर भी नहीं खरीद रही है। उन्होंने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि अगर इस आंकड़े को देखें तो किसान को 10 रुपये प्रति किलो भी नहीं मिल रहा है। उन्होंने तिरुपति में अपने घर पर आम किसानों की समस्याओं पर मीडिया से बात करते हुए एक वीडियो जारी किया। इस मौके पर भुमना ने कहा कि तोतापुरी आम की खरीद के लिए PDPS के तहत राज्य सरकार ने जो 4 रुपये प्रति किलो का सपोर्ट प्राइस घोषित किया है, वह बिल्कुल भी काफ़ी नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार को पता नहीं है कि किसान इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि जूस फैक्ट्रियां भी 6 रुपये प्रति किलो पर भी नहीं खरीद रही हैं।

उन्होंने और क्या कहा...

चित्तूर जिले में आम किसानों की हालत बहुत खराब हो गई है। इस साल जिले में करीब 7 लाख टन आम की फसल हुई थी, लेकिन मार्केट की सुविधा न होने के कारण 2 लाख टन फल पेड़ों के नीचे ही सड़ चुके हैं। जब किसान सैकड़ों ट्रैक्टर और लॉरी लेकर अपनी फसल बेचने जूस फैक्ट्रियों में आते हैं, तो उन्हें एक हफ्ते या दस दिन तक गेट के सामने इंतज़ार करवाया जाता है। नाथडू, जो अपनी आंखों के सामने फल सड़ते देखकर भी परवाह करते थे, अब बेसब्र हो गए हैं। उन्होंने कलेक्टरों के साथ रिव्यू मीटिंग की है और फैक्ट्री मालिकों से 6 रुपये देने को कहा है, लेकिन एक भी फैक्ट्री मालिक ने वह कीमत नहीं दी है। पिछली YSRCP सरकार में, YSRCP किसानों के साथ खड़ी रही और यह पक्का किया कि आम की कीमत 25 रुपये प्रति kg से कम न हो। लेकिन आज, चंद्रबाबू की सरकार अमरावती के लिए लाखों करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन क्या वह किसानों की मदद के लिए 250 करोड़ रुपये नहीं दे पा रही है?

- चंद्रबाबू को कर्नाटक से सीखना चाहिए

वे डींगें हांक रहे हैं कि केंद्र सरकार चंद्रबाबू के सपोर्ट से चल रही है। लेकिन क्या इतनी ताकत वाले चंद्रबाबू केंद्र से एक रुपया भी लाए हैं? पड़ोसी कर्नाटक में आम की फसल कम होने के बावजूद, केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने पहल की और पहली किस्त में 1.30 लाख टन तोतापुरी आम 17.50 रुपये प्रति kg खरीदने का GO लाया। दिल्ली में चरखा चलाने का दावा करने वाले चंद्रबाबू अपने ही जिले के किसानों के लिए केंद्र से खरीद क्यों नहीं करवा पा रहे हैं? सरकार की नाकामियों और फैक्ट्रियों के शोषण की वजह से सैकड़ों किसान तंग आकर सड़कों पर उतर आए हैं और अपनी मर्ज़ी से विरोध कर रहे हैं। कर्ज का बोझ न उठा पाने की वजह से वे अपने प्यारे आम के पेड़ काट रहे हैं और अपने बाग जला रहे हैं। चित्तूर जिले के किसानों की इस बुरी हालत की वजह चंद्रबाबू नायडू की नाकामी है। सरकार को तुरंत जवाब देना चाहिए और आम खरीदी फैक्ट्रियों का शोषण बंद करना चाहिए और फैक्ट्री के अंदर लाइन में लगे हर ट्रैक्टर लोड को अंदर तुरंत आमो का अनलोड करने के सख्त आदेश सरकार जारी करन चाहिए। अगर सरकार जवाब नहीं देती है, तो हम वाईएसआर पार्टी के साथ मिलकर किसानों की पक्ष से बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे कहा, भुमना करुणाकर रेड्डी ने चेतावनी दी।