'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से ₹1.14 करोड़ की ठगी, दो महीने तक साइबर ठगों के जाल में फंसा रहा पीड़ित
Retired Officer Duped of ₹1.14 Crore
मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड अधिकारी से 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर 1.14 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। साइबर अपराधियों ने खुद को विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को करीब दो महीने तक मानसिक दबाव में रखा और किस्तों में पूरी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली।
वीडियो कॉल से शुरू हुआ ठगी का खेल
शिकायत के अनुसार, साइबर ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED), क्राइम ब्रांच और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बताया। उन्होंने दावा किया कि रिटायर्ड अधिकारी का नाम एक गंभीर आर्थिक अपराध की जांच में सामने आया है और उन्हें जांच पूरी होने तक किसी से संपर्क न करने की हिदायत दी गई।
ठगों ने पीड़ित को कथित 'डिजिटल अरेस्ट' में होने का विश्वास दिलाते हुए लगातार अपनी निगरानी में रखा और मानसिक रूप से भयभीत कर दिया।
'वेरिफिकेशन' के नाम पर ट्रांसफर कराए 1.14 करोड़ रुपये
साइबर ठगों ने अधिकारी को भरोसा दिलाया कि बैंक खातों में जमा धनराशि की जांच और सुरक्षा के लिए उसे सरकारी निगरानी वाले खातों में जमा कराना होगा। साथ ही आश्वासन दिया गया कि जांच पूरी होने पर पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।
इसी झांसे में आकर पीड़ित ने 3 नवंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 के बीच अलग-अलग किस्तों में 1 करोड़ 14 लाख रुपये ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
सच्चाई सामने आने पर दर्ज कराई शिकायत
जब लंबे समय तक न तो रकम वापस मिली और न ही कथित अधिकारियों से संपर्क हो पाया, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने मंडी साइबर क्राइम पुलिस थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर ठगों के नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की अपील: 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने लोगों, विशेषकर बुजुर्गों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और कोई भी केंद्रीय जांच एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को धमकाकर पैसे ट्रांसफर नहीं करवाती।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि इस तरह की कोई संदिग्ध कॉल या वीडियो कॉल आए तो घबराएं नहीं, किसी भी अनजान खाते में पैसे न भेजें और तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।