प्रयागराज में 'सांस्कृतिक शौर्य संगम': सैन्य धुन और शास्त्रीय कला का अद्भुत मिलन
'Sanskritik Shaurya Sangam' in Prayagraj
प्रयागराज। संगम नगरी में रविवार की शाम भक्ति, शक्ति और देशभक्ति के एक ऐसे अनूठे संगम की साक्षी बनी, जिसने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अरैल घाट पर आयोजित 'सांस्कृतिक शौर्य संगम' में जब सेना के बैंड की ओजस्वी धुनें गूंजी तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तक भावविभोर हो उठे।
उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा, 'यह अद्भुत क्षण हैं और ऐसा समागम केवल त्रिवेणी की पावन धरा पर ही संभव है।' 'नार्थ टेक सिम्पोजियम-2026' के आगाज से पूर्व रविवार शाम आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।
पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपनी गायकी से राष्ट्र प्रेम और माटी की खुशबू को जीवंत कर दिया। वहीं, कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज के सुपुत्र और उनके दल की प्रस्तुति ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की भव्यता का प्रदर्शन किया। तबला और संतूर की जुगलबंदी ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम के अंत में रक्षा मंत्री ने इन कलाकारों को सम्मानित भी किया। थल सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी की उपस्थिति में रक्षा मंत्री ने सैनिकों के समर्पण की जमकर सराहना की।
राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों का शौर्य केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे अभियानों और प्राकृतिक आपदाओं में भी वे 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प के साथ सबसे पहले सेवा के लिए खड़े होते हैं।
इससे पहले, बमरौली एयरपोर्ट पर विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी और अन्य पदाधिकारियों ने रक्षा मंत्री का अभिनंदन किया। अरैल पहुंचने पर सेना के आला अधिकारियों ने उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया। कार्यक्रम में प्रतीक शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया।
सांस्कृतिक वैभव और सैन्य अनुशासन का यह मेल असल में सोमवार से शुरू होने वाले 'नार्थ टेक सिम्पोजियम' की एक झलक थी। तीनों सेनाओं के बैंडों ने सुरीली धुनों से अनुशासन का परिचय दिया।
सोमवार को न्यू कैंट के कोबरा ऑडिटोरियम में रक्षा मंत्री सिम्पोजियम का औपचारिक उद्घाटन करेंगे, जहां 284 कंपनियां स्वदेशी रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन करेंगी। प्रयागराज में आयोजित यह 'रक्षा कुंभ' न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है, जिसकी गौरवशाली शुरुआत अरैल के तट पर हो चुकी है।
रक्षा मंत्री रविवार शाम वायुसेना के विशेष प्लेन से प्रयागराज पहुंचे और फिर अरैल तट गए। सोमवार दोपहर वह दिल्ली के लिए रवाना होंगे।