मोहाली नगर निगम में मेयर पद की रेस तेज, तीन प्रमुख दावेदारों के बीच मुकाबला
Race for Mohali Municipal Corporation Mayor's Post Intensifies
मोहाली। Race for Mohali Municipal Corporation Mayor's Post Intensifies, पंजाब की सबसे अमीर नगर निगम में मेयर बनने को लेकर समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं। मेयर पद की दौड़ में प्रमुख रूप से तीन नाम उभर कर सामने आ रहे हैं। सरबजीत सिंह समाना, डाॅ. सनी सिंह आहलूवालिया और सुखदेव सिंह पटवारी दावेदारी जता रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञ सरबजीत के पलड़े को भारी मान रहे हैं, क्योंकि उनके पिता कुलवंत सिंह न सिर्फ विधायक हैं बल्कि वह मोहाली के पूर्व मेयर भी रह चुके हैं। परिस्थितियां भले ही कुछ भी रही हो लेकिन कुलवंत सिंह ने कभी भी मोहाली नहीं छोड़ा और जो 27 पार्षद जीतकर आए हैं उसमें से भी अधिकांश कुलवंत के समर्थक बताए जा रहे हैं।
डाॅ. सनी सिंह आहलूवालिया और सुखदेव सिंह पटवारी भी अपनी दावेदारी को मजबूत बता रहे हैं। पार्टी सूत्र बताते हैं कि अंतिम फैसला दिल्ली में ही होना है। वहीं, पार्टी के पास सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का विकल्प भी खुला हुआ है।
सरबजीत को पिता की विरासत का लाभ
तीनों नेताओं की अपनी राजनीतिक ताकत और अलग पहचान है। सरबजीत सिंह समाना लगातार तीसरी बार पार्षद चुने गए हैं और उन्हें विधायक कुलवंत सिंह के राजनीतिक प्रभाव का लाभ मिलता हुआ दिखाई देता है। चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति में कुलवंत सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पार्टी के कई निर्वाचित पार्षदों पर उनकी पकड़ को देखते हुए राजनीतिक हलकों में समाना को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि विधायक ने सार्वजनिक तौर पर किसी एक नाम का समर्थन करने से परहेज किया है और फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया है।
आहलूवालिया की संगठन में मजबूत पहचान
दूसरे प्रमुख दावेदार डाॅ. सनी सिंह आहलूवालिया हैं। राज्य स्तर पर पार्टी संगठन में उनकी मजबूत पहचान है और वे प्रदेश नेतृत्व के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। पहली बार पार्षद बनने के बावजूद उनका राजनीतिक कद उन्हें मेयर पद की दौड़ में आगे रखता है।
आहलूवालिया ने चुनाव में कड़ा मुकाबला जीतकर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता भी साबित की है। पार्टी के भीतर उनकी संगठनात्मक भूमिका और प्रशासनिक अनुभव को भी उनके पक्ष में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुखदेव को वरिष्ठता का सहारा
सुखदेव सिंह पटवारी अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर मजबूत दावा पेश कर रहे हैं। चार बार पार्षद रह चुके पटवारी नगर निगम की राजनीति के अनुभवी चेहरों में शामिल हैं।
पिछले कार्यकाल में वे सदन के सबसे सक्रिय नेताओं में रहे और कई मुद्दों पर विपक्ष की आवाज बने। शहर में उनकी जमीनी पकड़ और लंबे राजनीतिक अनुभव को उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
कहीं महिला पार्षद न बाजी मार ले
मेयर पद की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है की हाईकमान जो निर्णय लेगा उसी के अनुसार नाम पर घोषणा की जाएगी। यह भी कहा जा रहा है कि मेयर पद महिला वर्ग के लिए भी आरक्षित हो सकता है। क्योंकि इस बार निगम सदन में सभी पार्टियों से कुल 27 महिलाएं पार्षद चुन कर सदन में पहुंची हैं और इन में आप पार्टी की महिला पार्षदों की संख्या 13 है।