शिमला मर्डर केस: स्कूल संचालिका हत्याकांड में पुलिस जांच तेज, शूटर रिमांड पर, भाई से भी पूछताछ
Police investigation into school owner's murder intensifies
Shimla Murder Case: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली में सरस्वती पैराडाइज इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की संचालिका मनीषा मित्तल की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस जांच अब बेहद तेज हो गई है।
पुलिस ने इस मामले में न सिर्फ रोहतक से गिरफ्तार दोनों शूटरों को अदालत में पेश कर सात दिन के रिमांड पर लिया है, बल्कि मृतका के भाई हिमांक मित्तल को भी जांच के दायरे में ले लिया है।
शिमला से रोहतक पहुंची छह पुलिसकर्मियों की टीम ने उनके स्कूल पहुंचकर करीब 12 घंटे तक कड़ी पूछताछ की है। इस दौरान पुलिस ने स्कूल के सीसीटीवी फुटेज, हिमांक के मोबाइल फोन, बैंक अकाउंट डिटेल्स और पहचान पत्रों समेत कई अहम दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही आसपास के लोगों से भी फीडबैक लिया गया है।
भाई का दावा- 16 साल से नहीं हुई बात...
दूसरी ओर, हिमांक मित्तल ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि मेरा इस मर्डर केस से कोई लेना-देना नहीं है। मनीषा से मेरी पिछले 16 साल से कोई बात नहीं हुई थी। वह जहां-जहां केस करती थी, मैं कोर्ट में जाता था, लेकिन मैंने उसे कभी जान से मारने की धमकी नहीं दी। मुझ पर खुद कुछ समय पहले स्कॉर्पियो सवार लोगों ने हमला किया था, जिससे मेरे हाथ-पैर टूटे हुए हैं और मैं बिस्तर पर हूं।
हिमांक के मुताबिक, रविवार शाम को आई पुलिस टीम हर दो-तीन घंटे में उनसे पूछताछ करती रही और सोमवार शाम को वापस लौटी। उन्होंने पुलिस जांच में सहयोग करने का दावा किया है।
दोनों शूटर सात दिन के रिमांड पर, पिस्टल फोरेंसिक जांच के लिए भेजी
इस बीच, शिमला पुलिस ने सोमवार रात रोहतक से गिरफ्तार किए गए दोनों शूटरों आशीष अहलावत (22 वर्ष, निवासी दुजाना, झज्जर) और दीपक (25 वर्ष, निवासी सुनारिया खुर्द, रोहतक) को मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच शिमला जिला एवं सत्र न्यायालय (कोर्ट नंबर-5) में पेश किया।
पुलिस ने अदालत से 10 दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन अदालत ने दोनों को सात दिन के रिमांड पर भेजने के आदेश दिए। वारदात में इस्तेमाल पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेज दिया गया है।
वर्चुअल नंबर और रेकी, बेहद शातिराना ढंग से बनाई थी योजना
एएसपी शिमला सिटी मेहर पंवर के मुताबिक, आरोपितों ने पूरी योजना बनाकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। पुलिस से बचने के लिए शूटरों ने बेहद शातिराना तरीका अपनाया था। आरोपित वर्चुअल और हिमाचल के फर्जी नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि पुलिस उन्हें ट्रेस न कर सके। हत्या करने के बाद भागने के लिए उन्होंने मुख्य हाईवे के बजाय संपर्क (शार्टकट) सड़कों का इस्तेमाल किया, जिसकी रेकी उन्होंने पहले ही कर ली थी।
पारिवारिक विवाद के एंगल को जोड़कर भी की जा रही जांच
मूल रूप से रोहतक की रहने वाली 41 वर्षीय मनीषा मित्तल (पत्नी डॉ. सुभाष यादव, निवासी रेवाड़ी) शिमला के संजौली स्थित स्कूल की संचालिका थीं। 13 जून की शाम करीब साढ़े छह बजे स्कूल गेट के बाहर दो नकाबपोश हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ तीन गोलियां चलाई थीं, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
पुलिस रिमांड के दौरान अब दोनों शूटरों से कड़ी पूछताछ की जाएगी ताकि यह साफ हो सके कि आखिर इस हत्या की सुपारी (डील) किसने दी थी, कितने रुपये में सौदा तय हुआ था और क्या इस साजिश में कोई स्थानीय व्यक्ति भी शामिल है। पुलिस हत्या के इस मामले में हर पहलू और पारिवारिक विवाद के एंगल को जोड़ जांच कर रही है।