पीएम मोदी ने ओम बिरला को पत्र लिखकर लोकसभा में उनके संतुलन और निष्पक्षता की सराहना की

पीएम मोदी ने ओम बिरला को पत्र लिखकर लोकसभा में उनके संतुलन और निष्पक्षता की सराहना की

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PM Modi wrote a letter to Om Birla,

PM Modi letter to OM Birla: PM Modi wrote a letter to Om Birla, लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेटर लिखा. उन्होंने कहा कि सदन ने जिस स्पष्टता से इस प्रस्ताव को अस्वीकार किया, वह लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास का संकेत है. पत्र लिखकर स्पीकर के संयम, संतुलन और संसदीय परंपराओं के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की. दरअसल, पीएम मोदी ने लिखा था, "अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद सदन में ओम बिरला का वक्तव्य केवल तत्कालीन परिस्थितियों का उत्तर नहीं था. बल्कि भारतीय संसदीय परंपरा और लोकतांत्रिक मर्यादा की गहरी व्याख्या भी थी." 

असहमति और असम्मान के बीच अंतर हो- मोदी

उन्होंने कहा कि संसद देश की संवैधानिक संस्थाओं का सर्वोच्च मंच है और लोकसभा अध्यक्ष का दायित्व केवल कार्यवाही संचालित करने तक सीमित नहीं, बल्कि संस्थागत गरिमा की रक्षा करना भी है.

पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति और असम्मान के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि कभी-कभी राजनीतिक असहमति संसदीय मर्यादा के प्रति अनादर में बदलती दिखाई देती है और ऐसे समय में आसन पर बैठे व्यक्ति की निष्पक्षता की परीक्षा होती है.

प्रधानमंत्री ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी आसन के प्रति अनावश्यक कटुता देखने को मिली थी. ऐसी प्रवृत्तियां लोकतांत्रिक संस्था की गरिमा को प्रभावित करती हैं. 

पीएम ने की कोटा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की सराहना

उन्होंने कोटा एयरपोर्ट परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय दायित्वों के साथ अपने संसदीय क्षेत्र के विकास के प्रति बिरला की प्रतिबद्धता भी सराहनीय है. उन्होंने विश्वास जताया कि बिरला आगे भी निष्ठा और निष्पक्षता के साथ लोकसभा का संचालन करते रहेंगे और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में योगदान देंगे.

बिरला ने जताया आभार

प्रधानमंत्री के पत्र पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का पत्र भारत के संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है. उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री ने लंबे सार्वजनिक जीवन में लोकसेवा के उच्चतम नैतिक मूल्यों को जिया है.