रिश्वतखोरी केस में ओपी राणा पर शिकंजा, अदालत ने फिर जारी किया गैर-जमानती वारंट

रिश्वतखोरी केस में ओपी राणा पर शिकंजा, अदालत ने फिर जारी किया गैर-जमानती वारंट

Noose Tightens Around O.P. Rana in Bribery Case

Noose Tightens Around O.P. Rana in Bribery Case

चंडीगढ़। Noose Tightens Around O.P. Rana in Bribery Case, रिश्वतखोरी मामले में फंसे ओपी राणा के खिलाफ अदालत ने फिर गैर जमानती वारंट (नाॅन-बेलेबल वारंट) जारी किया है। उसे भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। जमानत याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।

यदि हाईकोर्ट से भी उसे राहत नहीं मिलती और वह जांच में शामिल नहीं होता तो जांच एजेंसियां उसके खिलाफ घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। पूरा मामला आठ मई को सामने आया, जब फाजिल्का के अबोहर निवासी अमित कुमार ने विजिलेंस के खिलाफ शिकायत दी।

अमित वर्तमान में स्टेट टैक्स ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ठेकेदार राघव गोयल और उसके पिता विकास गोयल उर्फ विक्की गोयल विजिलेंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर बिचौलियों की भूमिका निभा रहे थे।

शिकायतकर्ता के अनुसार, दोनों आरोपितों ने कहा कि विजिलेंस मुख्यालय में उसके खिलाफ लंबित शिकायत का निपटारा करवाने के लिए रिश्वत देनी होगी। अमित कुमार ने आरोप लगाया कि रिश्वत की रकम डीजीपी विजिलेंस शरद सत्य चौहान और उनके रीडर ओपी राणा के नाम पर मांगी जा रही थी।

शिकायत मिलते ही सीबीआई सक्रिय हो गई और मामले की जांच शुरू की गई। मामले की जांच और शिकायत के सत्यापन की जिम्मेदारी सीबीआई एसीबी चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर अरुण अहलावत को सौंपी गई। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपित राघव गोयल और विकास गोयल ने शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी।

सीबीआई जांच में यह भी खुलासा हुआ कि नकद रकम के अलावा आरोपितों ने ओपी राणा के लिए एक मोबाइल फोन की भी मांग की थी। सीबीआई ने आरोपितों को 13 लाख के साथ गिरफ्तार किया था। अब मामले में सभी की नजर बुधवार को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी है। यदि अदालत से ओपी राणा को राहत नहीं मिलती और वह जांच में शामिल नहीं होता, तो उसके खिलाफ भगोड़ा घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है।