बकरीद पर सड़कों पर नहीं होगी नमाज: सीएम योगी के बयान का मुस्लिम धर्मगुरुओं ने किया समर्थन, जारी की 12 सूत्रीय एडवाइजरी

बकरीद पर सड़कों पर नहीं होगी नमाज: सीएम योगी के बयान का मुस्लिम धर्मगुरुओं ने किया समर्थन, जारी की 12 सूत्रीय एडवाइजरी

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No street prayers on Bakrid: Muslim religious leaders support CM Yogi's statement

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़कों पर नमाज नहीं के बयान के समर्थन में मुस्लिम धर्मगुरु भी आ गए हैं।

इन सबने एक स्वर में कहा है कि बकरीद की नमाज मस्जिदों के भीतर ही अदा की जाएगी। इतना ही नहीं अगर जरूरत पड़ी तो नमाज अलग-अलग शिफ्ट में होगी। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा है कि ईद-उल-अजहा यानी बकरीद की नमाज हर वर्ष की तरह इस बार भी मस्जिदों और ईदगाहों के परिसर के भीतर ही अदा की जाएगी। भीड़ ज्यादा होने की स्थिति में नमाज के लिए कई शिफ्ट की व्यवस्था की जा सकती है।

बकरीद का पर्व 28 मई को है। लखनऊ सहित प्रदेश के सभी जिलों में इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। इसी दौरान मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बकरीद पर कुर्बानी और नमाज को लेकर एडवाइजरी जारी की है। शिया धार्मिक नेता मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि हमारा स्पष्ट कहना है कि बकरीद के दिन आपको कुर्बानी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लेकिन सिर्फ उन पशुओं की जिनकी हमारे देश के संविधान में कुर्बानी करने की अनुमति दी गई है।

12 सूत्रीय एडवाइजरी जारी

लखनऊ में मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने शुक्रवार को देश भर के मुसलमानों के लिए बकरीद की 12 सूत्रीय एडवाइजरी जारी की। उन्होंने इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया से एडवाइजरी करने के दौरान कहा कि बकरीद की नमाज मस्जिदों और ईदगाहों में ही पढ़ें। मुसलमान सड़कों पर नमाज न पढ़ें, अगर मस्जिदों और ईदगाहों में भीड़ अधिक हो तो शिफ्ट में नमाज पढ़ने में कोई हर्ज नहीं हैं, लेकिन सड़क पर नमाज न पढ़ें। उन्होंने कहा कि बकरीद पर कानूनी रूप से मान्य जानवरों की ही कुर्बानी हो। किसी भी कुर्बानी के फोटो या वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर न करें। उन्होंने कहा कि कुर्बानी का हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों में बांटे। इसके साथ ही कुर्बानी वाले स्थल की साफ-सफाई और स्वच्छता के बेहतर इंतजाम रखें। तय और अनुमति वाले स्थानों पर ही कुर्बानी करें। सड़क और गलियों में बिल्कुल भी कुर्बानी न करें।

हमेशा से कानून-व्यवस्था का पालन किया

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से जुड़े मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने बताया कि बकरीद के लिए मस्जिदों और ईदगाहों में बड़े पैमाने पर तैयारियां जारी हैं। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो अलग-अलग इमाम की अगुवाई में कई शिफ्टों में नमाज का इंतजाम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुसलमान परिसरों के अंदर ही नमाज पढ़ते आ रहे हैं। नमाज सिर्फ इबादत नहीं, बल्कि अनुशासन भी सिखाती है। सड़कों पर नमाज न पढ़कर मुसलमानों ने हमेशा कानून-व्यवस्था का सम्मान किया है और खुद को एक सभ्य समुदाय साबित किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार सभी समुदायों पर एक जैसे नियम लागू करेगी और किसी भी समुदाय को सड़कों पर जुलूस या जमावड़ा करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

शिया में कई शिफ्ट का कोई प्रावधान नहीं

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि कुर्बानी के लिए तो हमें गाय की तरफ नजरें उठाकर भी नहीं देखना चाहिए, क्योंकि हमारे हिंदू भाई उसकी पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गाय की कुर्बानी देता है तो वो इस्लाम के खिलाफ काम करेगा। इस्लाम में कहा गया है कि दूसरे धर्मों का सम्मान करना चाहिए। गाय की कुर्बानी की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही हमको सिर्फ मस्जिद में ही नमाज अदा करनी चाहिए, सड़क पर नहीं। शिया पंथ की प्रथा के अनुसार सामूहिक नमाज में कई शिफ्ट का कोई प्रावधान नहीं होता है। मुख्यमंत्री के बयान पर उन्होंने कहा कि यह इबादत का मामला है और किसी एक तरीके को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। नियम सब पर समान रूप से लागू हों। कोई भी ऐसी धार्मिक गतिविधि जिससे यातायात बाधित होता हो, उस पर रोक लगनी चाहिए।

योगी के बयान का समर्थन करने वाले धर्मगुरुओं के विचार

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात: राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बयान का समर्थन करते हुए कहा कि नमाज केवल साफ-सुथरे और शांत स्थानों (मस्जिद/घर) पर ही पढ़ी जानी चाहिए, सड़कों पर नहीं। उन्होंने भीड़ अधिक होने पर मस्जिदों में ही कई शिफ्टों में नमाज पढ़ने की व्यवस्था का सुझाव दिया। रजवी बरेलवी ने कहा कि इस्लाम के अनुसार नमाज के दौरान बंदे और अल्लाह के बीच कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। ऐसी एकाग्रता और शांति सड़कों या चौराहों पर नहीं, बल्कि मस्जिदों या घरों में ही मिल सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस्लामी कानून के तहत भीड़ बढ़ने पर एक ही मस्जिद में अलग-अलग इमामों के साथ कई जमातें बनाने की अनुमति है और बरेली में भी ऐसा किया जा सकता है।
मदरसा इस्लामिया अरबिया जामा मस्जिद: अमरोहा के मदरसा इस्लामिया अरबिया जामा मस्जिद के प्रिंसिपल, मुफ्ती सैयद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने भी माना कि बिना अनुमति सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ना इस्लामी उसूलों के मुताबिक सही नहीं है। मुसलमान अमूमन इसका पालन करते हैं।
देवबंद और अन्य धर्मगुरु: देवबंद के कई इस्लामिक धर्मगुरुओं सहित मौलाना साजिद रशीदी ने भी इस बात से सहमति जताई कि सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज से मस्जिदों के भीतर ही इबादत करने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा था

पिछले दिनों लखनऊ में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक कार्यक्रम में सड़कों पर नमाज को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि इस प्रकार की प्रवृत्ति ठीक नहीं है। नमाज एक निश्चित जगह पर ही होनी चाहिए और सभी को इसका पालन भी करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि अगर जगह कम पड़ रही हो तब पर भी सड़क पर नमाज पढ़ने के स्थान पर मस्जिद में ही शिफ्ट में नमाज पढ़ी जाए तो बेहतर होगा।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा था कि नमाज मस्जिदों के अंदर ही पढ़ी जानी चाहिए और सड़कों या खुली सार्वजनिक जगहों पर इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने सुझाव दिया था कि अगर आपके लिए नमाज़ पढ़ना जरूरी है, तो उसे शिफ्ट में पढ़ें। हम आपको नमाज से नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़कों पर इसकी इजाजत नहीं होगी।