लखनऊ में ट्रांसफार्मर रखरखाव के लिए मध्यांचल विद्युत निगम के नए निर्देश

लखनऊ में ट्रांसफार्मर रखरखाव के लिए मध्यांचल विद्युत निगम के नए निर्देश

New instructions of Madhyanchal Vidyut Nigam for

New instructions of Madhyanchal Vidyut Nigam for

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में बिजली व्यवस्था बेहतर करने के लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने एक बार फिर ट्रांसफार्मरों के रखरखाव को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में स्पष्ट है कि ट्रांसफार्मरों की मानीटरिंग बेहतर तरीके से की जाए।
निगम का उद्देश्य है कि किसी भी सूरत में बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। ट्रांसफार्मर मरम्मत के बाद ट्रांसफार्मर कार्यशाला से आता है तो उसमें किस रंग का निशान लगाया गया है, उसकी उसी हिसाब से मानीटरिंग की जाए। अगर ट्रांसफार्मर चार बार बनाया जा चुका है तो उसकी मानीटरिंग हर तीन माह में होनी ही चाहिए।

इसके अलावा रिपोर्ट पर अध्ययन करने के बाद निर्णय किया जाए कि संबंधित ट्रांसफार्मर को डिसमेंटल करने की आवश्यकता तो नहीं है। यही नहीं ट्रांसफार्मर की कुल कीमत का 40 प्रतिशत अगर ट्रांसफार्मर के बनने पर लग रहा है तो उसे डिसमेंटल यानी नष्ट कर दिया जाए। उसके स्थान पर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाए।

लखनऊ में छोटे व बड़े करीब 40 हजार ट्रांसफार्मर लगे हैं। इनमें चालीस प्रतिशत से अधिक ट्रांसफार्मर की एक या दो बार मरम्मत हो चुकी हैं। इनमें से पंद्रह प्रतिशत के आसपास ऐसे ट्रांसफार्मर हैं जिनकी तीन बार मरम्मत हो चुकी है। पांच से सात प्रतिशत ट्रांसफार्मर ऐसे हैं जिनको चार बार दुरुस्त किया गया है।

बिजली विभाग ने एक गाइड लाइन बना रखी है, इसमें पहली बार अगर कार्यशाला में ट्रांसफार्मर की मरम्मत होती है तो उस पर हरी पट्टी लगा दी जाती है। दूसरी बार में पीली, तीसरी बार में आरेन्ज पट्टी और चौथी बार में लाल पट्टी का निशान ट्रांसफार्मर में लगा दिया जाता है।

स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लाल पट्टी लगे ट्रांसफार्मरों की सूची संबंधित अभियंताओं के पास होगी और वह उसकी हर तीन माह में मानीटरिंग करेंगे और रिपोर्ट तैयार करेंगे कि ऐसे ट्रांसफार्मरों की क्या स्थिति है।