नरेन्द्र मोदी कैबिनेट ने वाराणसी को बड़ी सौगात, पीएम के संसदीय क्षेत्र को दो एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी
PM Modi Cabinet Decision
PM Modi Cabinet Decision : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को केंद्रीय कैबिनेट ने बड़ी सौगात दी है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट और कैबिनेट ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की बैठक में काशी को जाम से फ्री करने के लिए दो एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल लागत 25,446 करोड़ रुपये आएगी। ये कॉरिडोर बनारस शहर में भीड़ कम करने की योजना का एक महत्वपूर्ण हित्सा बनेंगे। इनके जरिए शहर की रफ्तार बढ़ेगी और यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
इसमें पहली परियोजना गंगा नदी के किनारे 46.039 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की है। इसमें छह लेन का एलिवेटेड मेन कैरिजवे, एक केबल-स्टे ब्रिज, एक एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड शामिल हैं। इसी कुल लागत 14,447.64 करोड़ रुपए होगी। इसमें 6,037.85 करोड़ रुपए की सिविल निर्माण लागत (यूटिलिटी शिफ्टिंग सहित, जीएसटी को छोड़कर) और एनएच(ओ) के तहत 541.11 करोड़ रुपए की भूमि अधिग्रहण लागत शामिल है।
यह परियोजना एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इससे शहर के सड़क नेटवर्क पर भीड़भाड़ काफी कम हो जाएगी और शहरी आवागमन में सुधार होगा। 80-100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार के लिए डिज़ाइन की गई इस परियोजना से प्रभावित क्षेत्र में औसत यात्रा समय लगभग 60 मिनट से घटकर 20 मिनट होने की उम्मीद है। यह लगभग 67 प्रतिशत की कमी होगी। एनएच-19 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा समय 50 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट हो जाएगा, जिससे लगभग 25 मिनट की बचत होगी।
वहीं दूसरी परियोजना वरुणा नदी के किनारे एनएच-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाले 43.218 किलोमीटर के लिंक कॉरिडोर की है। इसमें अधिकतर एलिवेटेड कॉरिडोर है जिसमें मेन कैरिजवे, फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड शामिल हैं। इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (एचएएम) के तहत बनाएगा। कुल लागत 10,998.32 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें 4,565.33 करोड़ रुपये की सिविल कंस्ट्रक्शन लागत और 934.91 करोड़ रुपये की जमीन अधिग्रहण लागत शामिल है। यह कॉरिडोर वाराणसी डीकंजेशन प्लान का एक बड़ा हिस्सा है। इससे एनएच-31 और काशी रेलवे स्टेशन की कनेक्टिविटी तो अच्छी होगी ही साथ ही, वाराणसी रिंग रोड, वाराणसी हवाई अड्डा, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, रामनगर पोर्ट, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के घाटों और आस-पास के चंदौली क्षेत्र तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा।
बढ़ेगी रफ्तार
यह कॉरिडोर 80–100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार के लिए डिज़ाइन किया गया यह प्रोजेक्ट एनएच-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा का समय लगभग 40 मिनट से घटाकर 20 मिनट कर देगा, जो लगभग 50 प्रतिशत की कमी है। इससे शहर के रोड नेटवर्क पर भीड़ में अत्यधिक कमी होगी, सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, गाड़ी चलाने का व्यय कम होगा और पैसेंजर एवं मालगाड़ी का ट्रैफिक तेज़ी से और बिना रुकावट के चल पाएगा। यह परियोजना एक इकोनॉमिक नोड (चंदौली सोशल इकोनॉमिक ज़ोन), एक सोशल नोड (चंदौली) और छह बड़े लॉजिस्टिक्स नोड तक पहुंच को बेहतर बनाकर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी सुदृढ़ करेगी, जिससे पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के हिसाब से मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन बढ़ेगा। इससे कृषि से संबंधित उत्पादों, औद्योगिक वस्तुओं, निर्माण सामग्रियों और खनिजों को लाना-ले जाना आसान होगा। इससे लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा और पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में बड़ी मदद मिलेगी।